जून 2018 से पहले अनिवार्य और अनुरोध के आधार पर टीचरों के तबादले होने थे, लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से तय समय पर तबादले न कर इसके लिए निर्धारित समय सारणी को पहले कुछ समय के लिए बढ़ाया गया।
इससे दूरदराज के स्कूलों में कार्यरत टीचर यह आस लगाए रहे कि देर से ही सही, लेकिन इस शिक्षा सत्र में उनका सुगम में तबादला हो जाएगा, लेकिन एक्ट बनने के बाद जहां अन्य विभागों में कर्मचारियों, अधिकारियों के तबादले हुए। वही, शिक्षा विभाग में एक्ट बनने के बावजूद तबादले नहीं किए जा सके।
विभाग ने बेसिक में हालांकि कुछ जनपदों में अनिवार्य तबादले किए, लेकिन अनुरोध के आधार पर तबादले नहीं किए जा सके। जबकि माध्यमिक शिक्षा में तो न अनिवार्य न ही अनुरोध के आधार पर तबादले हुए।
जिससे शिक्षक असमंजस की स्थिति में हैं। कुछ शिक्षकों का कहना है कि कुछ मंत्रियों और अधिकारियों के लोग अनिवार्य तबादलों की जद में आ रहे हैं। यही वजह है कि विभाग में एक्ट को लागू नहीं किया गया। जबकि शिक्षा विभाग में तबादलों के लिए ही इस एक्ट को बनाया गया।
खंडूडी सरकार के बाद त्रिवेंद्र सरकार में एक्ट बना, लेकिन दोनों ही बार इस पर अमल नहीं हो पाया। सरकार की ओर से तबादला सत्र शून्य भी घोषित नहीं किया गया। जिससे टीचरों में असमंजस की स्थिति बनी है।
- कमल किशोर डिमरी, प्रदेश अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ
अब अगले शिक्षा सत्र में ही टीचरों के तबादले होंगे, स्कूलों के दुर्गम, सुगम के निर्धारण को लेकर कुछ कोर्ट केस हो गए थे। अब बोर्ड परीक्षाएं सिर पर है, ऐसे में इस सत्र में तबादले संभव नहीं हैं। हमने कुछ बीमार टीचरों के प्रकरण शासन में भेजे हैं, लेकिन ये तबादले भी नहीं हुए।
- आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा