अदालत के इस फैसले के बाद शासन की और से इन शिक्षकों को मूल विद्यालय के लिए कार्यमुक्त करने के निर्देश पर रोक लगा दी गई। जबकि अन्य शिक्षकों को मूल विद्यालयों के लिए कार्यमुक्त किया गया। इसके बाद से मूल विद्यालयों के लिए कार्यमुक्त किए गए शिक्षकों में नाराजगी है।
इन शिक्षकों का कहना है कि पूरे प्रकरण में शासन की ओर से चहेते शिक्षकों को लाभ पहुंचाया गया है। शासन की ओर से इस मामले में शिक्षा निदेशालय को निर्देश जारी किया गया है कि पति-पत्नी के आधार पर शिक्षकों के तबादलों एवं उन्हें कार्यमुक्त करने के मामले में केवल प्रदेश सरकार के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के मामले में ही राहत मिलेगी। जबकि अन्य जितने भी पति पत्नी के आधार वाले मामले हैं, उन शिक्षकों को मूल विद्यालयों के लिए कार्यमुक्त किया जाए।