राज्य मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। दिव्यांगता के फर्जी प्रमाणपत्र मामले में न तो आरोपी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई हुई न ही इस तरह का प्रमाणपत्र देने वाले चिकित्सकों के खिलाफ। अब आरोपी शिक्षक कोर्ट जाने की तैयारी में है।
शिक्षा विभाग में दिव्यांगता के फर्जी प्रमाणपत्र से 51 शिक्षक नौकरी पा गए। विभाग ने इन शिक्षकों को नोटिस जारी किया है। विभाग की ओर से बताया गया कि हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका के बाद वर्ष 2022 में राज्य मेडिकल बोर्ड से कुछ शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच की गई। जिनके प्रमाणपत्र फर्जी मिले। 22 नवंबर 2025 को न्यायालय आयुक्त दिव्यांगजन ने इस तरह के शिक्षकों की सूची शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराते हुए इनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन अब तक शिक्षकों और इस तरह का फर्जी प्रमाणपत्र देने वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई हुई। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कुछ शिक्षक अपने दिव्यांगता का प्रमाणपत्र लेकर निदेशालय पहुंचे। इन शिक्षकों का कहना है कि उनके प्रमाणपत्र सही हैं। वे इस प्रकरण में कोर्ट जाएंगे।
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प्रारंभिक शिक्षा में भी इस तरह के शिक्षक
प्रारंभिक शिक्षा में भी इस तरह के शिक्षक हो सकते हैं। टीईटी पास करने के लिए कुछ अभ्यर्थियों ने दिव्यांगता के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाएं हैं। शिक्षकों का कहना है कि प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए।