एक सरकारी स्कूल ई शिक्षा के मामले में निजी स्कूलों को चुनौती दे रहा है। संसाधनों और छात्र संख्या के अभाव में जब शहरी क्षेत्रों के सरकारी स्कूल बंदी की कगार पर हैं, तब भौगोलिक रूप से दुर्गम श्यामपुर के टाटवाला गांव का राजकीय प्राइमरी स्कूल उम्मीद के सूरज से कम नहीं है।
शिक्षकों ने यह साबित कर दिखाया कि नामुमकिन कुछ भी नहीं है। स्कूल के इस प्रोजेक्ट को विद्यालय बने आनंदालय नाम दिया गया। जिसकी शुरूआत वर्ष 2010 में स्कूल के सहायक अध्यापक डा. शिवा अग्रवाल ने खुद के खर्च से एक लैपटॉप और एक कैमरा प्रोजेक्टर से की थी, जो अब ई हब के रूप बड़ा आकार ले चुका है।
विद्यालय में संसाधनों की कमी नहीं है। पूरे गांव के बच्चों को सामान्य शिक्षा ही नहीं कंप्यूटर साक्षर बनाने की मुहिम छेड़ी गई है। गांव के बच्चे ई हब में कंप्यूटर कोर्स ही नहीं करते बल्कि कविता, प्रेरणादायक कहानी व फिल्म के जरिये उनका ज्ञानवर्द्धन किया जाता है।