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अशासकीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर न्यून लिखे जाने पर भड़के शिक्षक

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शिक्षा निदेशक की ओर से अशासकीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर न्यून लिखे जाने पर भड़के माध्यमिक शिक्षक संघ ने इसके विरोध में प्रदेश भर में आंदोलन का एलान किया है। संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. अनिल शर्मा ने कहा कि शिक्षा मंत्री ने एक अगस्त को शिक्षा निदेशालय में बैठक बुलाई है। यदि कोई सकारात्मक निर्णय न लिया गया तो शिक्षक बैठक के बाद आंदोलन शुरू करेंगे।
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शिक्षा निदेशालय की ओर से समस्त मुख्य शिक्षा अधिकारियों को लिखा गया है कि अशासकीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर न्यून होने के साथ ही छात्रों की संख्या घट रही है। इन स्कूूूलों की समीक्षा की जाए। निदेशालय के इस पत्र से शिक्षकों में नाराजगी है। उत्तराखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डा. अनिल शर्मा ने कहा कि निदेशालय की ओर से जो पत्र लिखा गया है उसकी भाषा आपत्तिजनक और शिक्षकों को अपमानित करने वाली है। अशासकीय स्कूलों में संसाधनों की कमी के बावजूद इन स्कूलों का परीक्षाफल, राष्ट्रीय स्तर तक प्रदर्शन, अनुशासन, स्वच्छता, समाज में मान्यता एवं स्वीकार्यता राजकीय विद्यालयों की अपेक्षा हर तरह से बेहतर है।
शिक्षकों ने कहा कि सरकार सरकारी स्कूलों के छात्र-छात्राओं को जहां टैबलेट, पाठ्य-पुस्तकें, स्कूल ड्रेस, रमसा के तहत अन्य सुविधाएं दे रही हैं। वहीं अशासकीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को इन तमाम सुविधाओं से वंचित कर उनके साथ दोहरा व्यवहार किया जा रहा है। शिक्षकों ने कहा कि सरकारी स्कूलों के शिक्षक पति-पत्नी दोनों को आवास भत्ते का लाभ दिया जा रहा है। जबकि अशासकीय को इससे वंचित रखा गया है। अशासकीय स्कूलों के शिक्षकों के अब तक आयुष्मान गोल्डन कार्ड भी नहीं बने। इसके अलावा चयन-प्रोन्नत वेतनमान पर वित्त विभाग की अनापत्ति के बावजूद एक वेतनवृद्धि भी नहीं दी जा रही है।
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