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शिक्षकों के प्रमाण पत्रों को लेकर हुआ नया खुलासा, यूपी से जारी शैक्षिक प्रमाणपत्रों में हुआ बड़ा खेल

Tue, 13 Nov 2018 08:41 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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teacher - फोटो : demo pic
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शिक्षा विभाग में अमान्य प्रमाण पत्रों से हुई नियुक्तियों के मामले में यूपी के शैक्षिक प्रमाणपत्रों में बड़ा खेल उजागर हुआ है। एसआईटी जांच में अब तक 44 शैक्षिक प्रमाण पत्र अमान्य मिले हैं, ये सभी उत्तर प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों से जारी दर्शाए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा बीटीसी और बीएड की डिग्री शामिल हैं। इसके उलट जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्रों के फर्जीवाड़े में उत्तराखंड अव्वल रहा है।

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अमान्य प्रमाणपत्रों से शिक्षा विभाग में नियुक्तियों के इस खेल का पर्दाफाश अमर उजाला ने किया था। अमर उजाला ने मुहिम चलाकर एक दर्जन के करीब शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों पर सवाल उठाए थे। पहले तो विभागीय स्तर पर मामले को दबाने की भरसक कोशिश की गई।

बाद में शासन ने जांच को सीबीसीआईडी की एसआईटी गठित की थी। एसआईटी अब तक शिक्षकों के करीब 20 हजार शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन करा चुकी हैं। इनमें उत्तराखंड, यूपी, पंजाब और हरियाणा से जुड़े शैक्षिक प्रमाण पत्र थे। एसआईटी सत्यापन में मेरठ, गोरखपुर और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जारी बीटीसी और बीएड के करीब 44 प्रमाण पत्र अमान्य पाए गए हैं, जिनमें आरोपी शिक्षकाें द्वारा कई तरह के खेल किए गए हैं।

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प्रदेश की श्रीनगर और दूसरे राज्याें की यूनिवर्सिटी के प्रमाण पत्र सही मिले हैं। हालांकि प्रमाण पत्रों के सत्यापन का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। आने वाले दिनो में कुछ अन्य खुलासे होने की आशंका जताई जा रही है। 

शैक्षिक प्रमाण पत्रों में यूपी तो जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्रों के फर्जीवाड़े में उत्तराखंड अग्रणी रहा है। शिक्षकाें द्वारा फर्जी जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाने का बड़ा खेल हरिद्वार जिले में हुआ है। अब तक ऐसे 11 प्रमाणपत्र पाए गए हैं, जिनके आधार पर भर्ती का अनुचित लाभ उठाया गया। कई अन्य मामले अभी विचाराधीन हैं। 

एसआईटी जांच में अब तक 44 प्रमाणपत्र अमान्य पाए गए हैं, वो सब यूपी की यूनिवर्सिटी की तरफ से जारी दर्शाए गए हैं। उत्तराखंड में जाति और स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी करने में खेल हुआ है। इन मामलों में विभागीय स्तर पर जांच के लिए अलग से लिखा गया है। 
श्वेता चौबे, प्रभारी, एसआईटी, सीबीसीआईडी। 
 
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