स्कूलों में बच्चों को मिड डे मील परोसे जाने से पहले इसकी पूरी जांच की जाएगी। शिक्षक खुद भोजन चखेंगे।
कहीं भी खाना खुले में नहीं बनाया जाएगा, जबकि भोजन की गुणवत्ता का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। यह निर्देश डीएम बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने प्रशासनिक और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दिए हैं। डीएम ने सभी एसडीएम और तहसीलदारों को अपने-अपने क्षेत्र में मिड डे मील की औचक जांच करने को कहा है।
हर स्कूल में एक रजिस्टर होगा
जिलाधिकारी ने रविवार एमडीएम की समीक्षा बैठक लेते हुए कहा कि हर स्कूल में अब एक रजिस्टर होगा। इसमें दर्ज किया जाएगा कि हर रोज भोजन बनने के बाद किस शिक्षक ने चखा और भोजन की गुणवत्ता कैसी थी। डीएम ने कहा कि भोजन बनाने वाली जगह पर शिक्षक और भोजनमाता के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति को न जाने दिया जाए। जिलाधिकारी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी निरंतर एमडीएम की समीक्षा के निर्देश दिए।
बैठक में मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी खाली, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक पदमेंद्र सकलानी, समस्त खंड शिक्षा अधिकारी मौजूद थे।
रायपुर बीईओ से मांगी रिपोर्ट
गंदे पानी से भोजन बनाने और स्कूलों में पेयजल व्यवस्था न होने के मामले में जिला शिक्षाधिकारी बेसिक ने सभी बीआरसी और सीआरसी को औचक जांच का आदेश जारी कर दिया है। बता दें कि दून के प्राथमिक विद्यालय लक्खीबाग, बंजारावाला, रामगढ़, गोरखपुर में अमर उजाला की टीम ने कुछ जगह गंदे पानी से भोजन बनता पाया, तो कुछ जगह पानी की व्यवस्था ही नदारद थी। इस मामले में रायपुर के बीईओ को तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
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