विद्यालय में पढ़ाई के साथ ही वे क्षेत्र के गरीब छात्र-छात्राओं को न सिर्फ पढ़ाते हैं वह उनकी पढ़ाई का खर्चा स्वयं उठाते हैं। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान मसोली गांव की अंजलि के पिता की मौत हो गई थी और एक माह बाद उसकी मां की तबियत खराब होने पर उनकी भी मौत हो गई थी।
वह तब सातवीं कक्षा की छात्रा थी और उसके दादा-दादी के पास रहती थी। माता-पिता की मौत के कारण वह आगे की पढ़ाई में असमर्थ थी।
जब धन सिंह को इस छात्रा के बारे में पता चला तो उन्होंने अंजली की पढ़ाई का खर्चा स्वयं उठाया। अभी अंजलि जीआईसी गोदली में बारहवीं की छात्रा है। शिक्षक धन सिंह घरिया कहते हैं कि बचपन से ही असहाय बच्चों के उत्थान की ललक थी। छात्र-छात्राओं की मदद करके मन को सुकून मिलता है।