माई सिटी रिपोर्टर देहरादून। एलटी से प्रवक्ता पदों पर पदोन्नति के लिए गेस्ट टीचर की नियुक्ति वाले स्कूलों को खाली न दिखाने पर शिक्षकों ने सख्त नाराजगी दिखाई है। राजकीय शिक्षक संघ ने कहा कि सरकार नियम विरुद्ध काम कर रही है और अगर इसमें सुधार नहीं किया गया तो वो कोर्ट की शरण लेंगे। राजकीय शिक्षक संघ की दून इकाई के अध्यक्ष सुभाष झलड़ियाल और मंत्री नागेंद्र पुरोहित ने मुख्य शिक्षा अधिकारी के माध्यम से सचिव शिक्षा और निदेशक माध्यमिक शिक्षा को ज्ञापन भेजा। उन्होंने कहा कि एलटी से प्रवक्ता के पदों पर पदोन्नति के दौरान काउंसलिंग में गेस्ट टीचर की नियुक्ति वाले स्कूलों को खाली नहीं दिखाया जा रहा है। जबकि गेस्ट टीचर की भर्ती के शासनादेश में स्पष्ट है कि यह व्यवस्था नितांत अस्थाई है। नियमित नियुक्ति, सीधी भर्ती, पदोन्नति या स्थानांतरण होने पर यह अस्थाई व्यवस्था खुद ही समाप्त हो जाएगी। 17 जुलाई 2020 को शासनादेश जारी करते वक्त इस तथ्य का संज्ञान नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि 25-30 वर्षों से एक जगह पढ़ा रहे शिक्षकों की पदोन्नति या स्थानांतरण के समय वास्तविक रिक्त पदों को जानबूझकर रिक्त ना दिखाना अन्याय है। उन्होंने कहा कि राजकीय शिक्षक संघ देहरादून कार्यकारिणी इस फैसले का विरोध करती है और संशोधित करने की मांग करती है। जिन पदों पर गेस्ट टीचर कार्यरत हैं, उन्हें शासनादेश और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार रिक्त माना जाए। अगर सरकार नियमानुसार गेस्ट शिक्षकों के पदों को खाली नहीं मानती है तो राजकीय शिक्षक संघ कोर्ट की शरण लेगा।