बच्चों के भविष्य के लिए इस शिक्षक ने ऐसा फैसला लिया कि अब शिक्षा विभाग ने उन्हें सलाम करा रहा है। शिक्षक का यह फैसला अन्य सभी शिक्षकों के लिए भी मिसाल है। दस साल तक दुर्गम विद्यालय में तैनाती के बाद जब प्राथमिक शिक्षक विजय सिंह बनंग्याल का इस बार प्रमोशन हुआ तो उन्होंने अति दुर्गम विद्यालय का चुनाव कर लिया।
शिक्षा विभाग में शिक्षकों के प्रमोशन के समय बाकायदा काउंसलिंग होती है और शिक्षकों से विद्यालय का विकल्प मांगा जाता है। आमतौर पर प्रमोशन के समय शिक्षक इसी जुगाड़ में रहते हैं कि सुगम विद्यालय मिल जाए, लेकिन विजय सिंह ने इस मिथक को तोड़कर अन्य शिक्षकों के लिए भी नजीर खड़ी कर दी है।
जिला शिक्षाधिकारी शौकत अली ने बताया कि तेजम विद्यालय के लिए किसी अन्य शिक्षक ने अपना विकल्प काउंसलिंग के समय नहीं भरा। सिर्फ विजय सिंह ने इस विद्यालय का चयन कर सराहनीय कदम उठाया है।
विजय सिंह अब तक सोबला क्षेत्र के दुर्गम प्राथमिक विद्यालय यावलदांग में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात थे। प्रमोशन के समय जब उनकी काउंसलिंग हुई तो उन्होंने अति दुर्गम प्राथमिक विद्यालय तेजम का चयन किया।
वह अब तेजम विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्त हो गए हैं। बताया गया कि काउंसलिंग के समय किसी भी शिक्षक ने तेजम विद्यालय का विकल्प नहीं भरा था और कोई भी शिक्षक इस विद्यालय में जाने का इच्छुक नहीं था। वैसे शिक्षा विभाग में एक नियम यह भी है कि यदि कोई शिक्षक लगातार दुर्गम में नौकरी करता है तो प्रमोशन और स्थानांतरण के समय उसे सुगम स्थान दिया जाए, लेकिन इस नियम का कभी पालन नहीं होता।
यावलदांग विद्यालय में शिक्षक विजय सिंह को विदाई दी गई। विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में सहायक अध्यापक जीवन बिष्ट ने कहा कि आज के दौर में शिक्षक बड़े शहरों या सुगम विद्यालयों में जाने की जुगाड़ में लगे रहते हैं ऐसे में प्रमोशन पर भी अति दुर्गम तेजम विद्यालय को चुनकर अध्यापक विजय सिंह ने सभी अध्यापकों को सेवा का मार्ग दिखाने का कार्य किया है।
प्राथमिक विद्यालय यावलदांग में भी विजय सिंह का सेवाकाल बेहद सराहनीय रहा। स्कूल प्रबंध समिति के अध्यक्ष पूरन सिंह ने कहा कि ऐसे अध्यापकों के कारण ही आज सीमांत के प्राथमिक विद्यालयों का अस्तित्व बचा है। इस दौरान कुंवर सिंह, बहादुर सिंह, त्रिलोक सिंह, सोबन सिंह, नैन सिंह, मानबहादुर सिंह, मक्खन राम आदि उपस्थित थे।