उत्तराखंड में फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे शिक्षक बनने वालों को अब नपना पड़ सकता है। शिक्षा विभाग ऐसे मामलों की जांच कराने की तैयारी में हैं।
25 हजार रुपए का जुर्माना
आरटीआई के एक मामले में शिक्षा विभाग ने खुद ही स्वीकार किया है कि हरिद्वार और उधमसिंहनगर में ऐसे कई शिक्षक हैं जो बीस-बीस साल से फर्जी प्रमाणपत्र पर नियुक्ति पाकर शिक्षक बने हुए हैं।
इनमे से कई तो अब प्रधानाचार्य भी बन गए हैं। ऐसे ही एक मामले के सामने आने पर राज्य सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल ने संबंधित शिक्षक पर 25 हजार रुपए का जुर्माना ठोका है।
मुरादाबाद के मोहम्मद आजम वारसी ने सूचना के अधिकार के तहत राजकीय उच्च प्राथमिक विघालय पीली पड़ाव हरिद्वार के प्रधानाचार्य हरपाल सिंह के प्रमाण पत्र मांगे थे। यह मामला जब आयोग तक पहुंचा तो नतीजा बेहद चौंकाने वाला रहा।
कोई सत्यापित प्रमाण पत्र नहीं
पता लगा कि हरपाल सिंह के पहले नियुक्ति आदेश में न तो उनके प्रमाण पत्र हैं और न ही उनकी कोई सत्यापित प्रतिलिपि।
राज्य सूचना आयुक्त विनोद नौटियाल ने हरपाल सिंह को डीम्ड लोक सूचना अधिकारी बनाते हुए प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए कहा तो हरपाल सिंह ने यह भी नहीं किया।
शिक्षा विभाग ने खोजबीन की तो हरपाल सिंह के प्रमाण पत्र कहीं मिले ही नहीं। पहले तो शिक्षा विभाग ने कहा कि बीस साल पुराने शैक्षिक योग्यता के प्रमाण पत्र नहीं दिए जा सकते।
बाद में आयुक्त का निर्देश हुआ तो शिक्षा विभाग ने मान लिया कि हरपाल सिंह ही नहीं हरिद्वार और उधमसिंहनगर में कई ऐसे शिक्षक हैं जो बीस साल से फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे हैं।
इनमें से कई तो प्रधानाचार्य भी बन गए। आयुक्त ने इस बात को गंभीरता से लेते हुए हरपाल सिंह पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है।
सुनवाई के दौरान यह भी साफ हुआ कि इस मामले में किसी न किसी स्तर पर शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं।
आयोग के कहने पर अब शिक्षा विभाग इस तरह के मामलों की जांच करने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक हरपाल सिंह को निलंबित करने का आदेश भी जारी कर दिया गया है।