राज्य में एक वर्ष पहले उच्चीकृत किए गए राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय विभागीय उदासीनता के शिकार हैं। सरकार ने इन स्कूलों का उच्चीकरण तो कर दिया, लेकिन शिक्षकों की तैनाती और अन्य मुलभूत सुविधाएं मुहैया कराना मुनासिब नहीं समझा। इसके चलते इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में है।
हल्द्वानी स्थित राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय किशनपुर को उच्चीकृत कर बालिका इंटर कॉलेज बनाया गया है। एक वर्ष बाद यहां उच्चीकृत कक्षाओं का संचालन को शुरू कर दिया गया, लेकिन सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। प्रवक्ताओं के पांच पद मंजूर हुए, लेकिन तैनाती नहीं हो सकी है। वहीं भवन न होने के कारण छात्राएं आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं।
चमोली जिले के दूरस्थ राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घेस को इंटरमीडिएट कॉलेज बनाया गया। एक प्रधानाचार्य, पांच लेक्चरर व दो बाबू के पद स्वीकृत हुए। कॉलेज में इस वर्ष 11वीं कक्षा में करीब 80 प्रवेश भी हुए, लेकिन सिर्फ हिंदी के एक लेक्चरर को तैनाती हो पाई है।
वर्ष 2016-17 में प्रदेश सरकार ने 77 स्कूलों को हाईस्कूल और 114 को इंटरमीडिएट स्तर तक उच्चीकृत किया था। उच्चीकरण के साथ ही विद्यालयों में शिक्षकों व अन्य स्टाफ की तैनाती और भवन, प्रयोगशाला समेत अन्य सुविधाएं जुटाने के निर्देश भी हुए, लेकिन विभाग अब तक इस ओर से नजरें फेरे हुए है। ज्यादातर उच्चीकृत स्कूलों में शिक्षकों का टोटा है। भवन, प्रयोगशाला जैसी अन्य सुविधाएं भी नहीं हैं।
जिलावार उच्चीकृत स्कूलों की संख्या
जिला - हाईस्कूल - इंटर
बागेश्वर - 04 - 05
पिथौरागढ़ - 09 - 11
टिहरी - 27 - 20
हरिद्वार - 03 - 02
पौड़ी - 07 - 14
यूएस नगर - 02- 03
उत्तरकाशी - 02 - 04
देहरादून - 03 - 15
चंपावत - 01 - 06
चमोली- 08 -14
नैनीताल - 08 - 09
अल्मोड़ा - 03 - 08
रुद्रप्रयाग - 00 - 03
योग - 77 - 114
उच्चीकृत स्कूलों में शिक्षकों के पद भरे जा रहे हैं। काउंसिलिंग के माध्यम से शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में भेजा जा रहा है, जहां ज्यादा पद खाली हैं। बहुत जल्द सभी स्कूलों में पद भर दिए जाएंगे।
- अरविंद पांडेय, शिक्षा मंत्री