शासनादेश के फेर में पुरानी पेंशन योजना से वंचित हुए उत्तराखंड के लगभग
डेढ़ हजार शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन मिलने की उम्मीद जग गई है।
कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा प्रस्ताव
शिक्षा विभाग की ओर से बुधवार इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। सात फरवरी को होने वाली कैबिनेट की बैठक में इसे रखा जाएगा। वित्त विभाग भी इस प्रस्ताव पर सहमत है। इसे मंजूरी मिली तो अन्य विभागों के कर्मचारियों को भी इसका फायदा हो सकता है।
शिक्षकों की इस मांग को अभी तक नकार रहे शिक्षा विभाग का रुख अब बदल गया है। इस मामले में शिक्षकों की याचिका पर हाईकोर्र्ट योजना का लाभ देने का आदेश दे चुका है। इस फैसले के खिलाफ शिक्षा विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चार से अधिक याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं, लेकिन अब इस मामले को मंजूरी के लिए कैबिनेट में रखने की तैयारी है।
इसके प्रस्ताव में कहा गया कि पुरानी पेंशन के लिए 765 शिक्षकों ने 57 याचिकाएं दाखिल की हैं। याचिकाओं में और बढ़ोत्तरी होनी की संभावना है। शिक्षकों के सभी संघ पुरानी पेंशन योजना की मांग कर रहे हैं। अपर मुख्य सचिव एस राजू ने बताया कि प्रस्ताव तैयार हो चुका है, जिसपर अब कैबिनेट को फैसला करना है।
शिक्षकों की पुरानी पेंशन पर वित्त की ओर से कोई अड़चन नहीं है। यदि कही कोई चीज अटक रही है तो कैबिनेट में रखी जा सकती है।
- इंदिरा हृदयेश, वित्त मंत्री
ऐसे फंसा पेच
शासन ने 25 अक्तूबर 2005 को अंशदायी पेंशन योजना की अधिसूचना जारी की थी। इसे एक अक्तूबर 2005 से लागू किया गया था। इस बीच जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई उन्हें योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया।
इस पर प्रभावित शिक्षक अदालत चले गए। अदालत से शिक्षकों के पक्ष में फैसला आया है। वहीं अपर मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव व शिक्षा निदेशक के खिलाफ फैसले पर अमल न करने पर अवमानना का मामला भी बना है।