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इंदिरा, निशंक, हरक की राह पर कई टीचर 

Thu, 02 Feb 2017 12:47 PM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
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harak singh rawat - फोटो : file photo
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उत्तराखंड की सियासत में ऐसे नेताओं की अच्छी खासी तादाद है जिन्होंने टीचर बनकर करियर की शुरूआत की फिर इसे छोड़कर राजनीति की राह पकड़ ली।
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शिक्षक से विधायक, मुख्यमंत्री और फिर एमपी का सफर तय करने वाले टीचरों में निशंक तो है ही कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश और मंत्री रहे हरक सिंह रावत भी सियासत कर रहे हैं। इनकी सफल राजनीतिक पारियों ने शिक्षक समुदाय में सियासत के प्रति गजब आकर्षण पैदा किया। यही वजह है कि मौजूदा विधान सभा चुनाव में कई टीचर ताल ठोक रहे हैं।    

हरिद्वार सांसद डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने वर्ष 1982-83 में जगमोहन सरस्वती शिशु मंदिर मोती बाजार देहरादून में सहायक अध्यापक के रूप में करियर की शुरूआत की। बाद में जोशीमठ और श्रीनगर में बच्चों को पढ़ाने के दौरान राजनीति की राह पकड़ ली। पूर्व मंत्री डा.हरक सिंह रावत भी एचएनबी केंद्रीय विश्वविद्यालय में बच्चों को पढ़ाते थे।
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कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रही एवं वर्तमान में चकराता से भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरी मधु चौहान, विधायक प्रोफेसर जीतराम, यशपाल बेनाम भी टीचर से सक्रिय राजनीति में पहुंचे हैं। जिनकी राह पर इस विधान सभा चुनाव में कई टीचर ताल ठोके हुए हैं।

घनसाली से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे शूरवीर लाल तो वीआरएस लेकर राजनीति में सक्रिय हुए हैं। वही सल्ट से कांग्रेस के चुनाव पर चुनाव मैदान में उतरी गंगा पंचोली प्रवक्ता हैं और माध्यमिक शिक्षक संघ में उपाध्यक्ष रही हैं। केदारनाथ से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रही शैलारानी रावत भी प्रिंसिपल हैं। 
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शिक्षक प्रकोष्ठ नेताओं की चुनाव ड्यूटी से खड़े हुए सवाल 
प्रदेश में कई टीचर ऐसे हैं जो भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के शिक्षा प्रकोष्ठों में अहम पदों पर हैं, इसके बावजूद इनकी चुनाव में ड्यूटी लगी है। शिक्षक नेता अनिल नौटियाल ने कहा कि इससे चुनाव की विश्वसीनयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी राधा रतूडी ने कहा कि इन टीचरों के मामले में संबंधित जिलाधिकारियों को लिखा गया है कि इनकी चुनाव में ड्यूटी न लगाई जाए। इसके बावजूद कही से कोई शिकायत आती है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
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