पहाड़ी राज्य में गुरुजी पहाड़ चढ़ने को तैयार नहीं हैं, सुविधाजनक स्थानों के लिए वे प्रभारी प्रिंसिपल का पद छोड़ रहे हैं। स्कूलों में प्रभारी प्रिंसिपलों के लिए 314 हेडमास्टरों में से मात्र 128 ने आवेदन किया। शिक्षा निदेशालय ने शासन को विकल्प सहित इसका प्रस्ताव भेज दिया है।
प्रदेश के इंटर कॉलेजों में प्रिंसिपलों के इक्का दुक्का नहीं बल्कि आधे से अधिक पद खाली हैं। इन पदों पर प्रिंसिपलों की स्थाई नियुक्ति न होने तक प्रभारी प्रिंसिपलों को नियुक्त किया जा सके इसके लिए विभाग की ओर से हेडमास्टरों से आवेदन मांगे गए, लेकिन प्रभारी प्रिंसिपलों के 314 पदों के लिए मात्र 128 ने ही आवेदन किया।
इसकी मुख्य वजह यह है कि हेडमास्टर प्रभारी प्रिंसिपल के पद के लिए अपनी पसंद के विद्यालयों को छोड़ने को तैयार नहीं है। एक वजह यह भी बताई जा रही है कि उन्हें प्रभारी प्रिंसिपल के पद पर अधिकार तो सब दिए गए हैं, लेकिन प्रभारी के पद पर वेतन में कोई इजाफा नहीं हो रहा। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि 128 प्रभारी प्रिंसिपलों के प्रस्तावों को अनुमोदन के लिए शासन को भेज दिया गया है।
आधे से अधिक पद हैं रिक्त
प्रदेश में प्रिंसिपलों के 1200 पदों में से करीब 700 पद रिक्त हैं, इन पदों में से 314 पदों पर प्रभारी प्रिंसिपलों की नियुक्ति की जा सके इसके लिए विभाग की ओर से आवेदन मांगे गए।
नहीं भरे जा सके रिक्त पद
हेड मास्टर से प्रिंसिपल के पद पर प्रमोशन के लिए पांच साल की सेवा एवं इससे पहले दो साल का प्रोविजन पीरियड का होना अनिवार्य है, लेकिन प्रिंसिपलों की कमी को देखते हुए सेवाकाल में 50 फीसदी की छूट दी गई। इसके बाद भी प्रिंसिपलों के रिक्त पद नहीं भरे जा सके।
इनका है कहना
प्रभारी प्रिंसिपलों के 314 पदों में से विभाग को मात्र 128 आवेदन मिले हैं, जिनकी काउंसिलिंग के बाद विकल्प सहित इनके प्रस्ताव को अनुमोदन के लिए शासन को भेज दिया गया है।
-यूडी गोस्वामी, उप निदेशक शिक्षा, उत्तराखंड
प्रभारी प्रिंसिपल को प्रिंसिपल के अधिकार तो दिए गए हैं, लेकिन वेतन में कोई बढ़ोत्तरी नहीं की गई, यही वजह है कि हेडमास्टरों ने इसके लिए आवेदन नहीं किए।
-एसएस बिष्ट, अध्यक्ष राजकीय प्रिंसिपल एसोसिएशन, उत्तराखंड