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बैठक नहीं तमाशा, बच्चों की तरह झगड़ पड़े गुरूजी

Sun, 08 Sep 2013 09:48 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून में राजकीय शिक्षक संघ की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में शिक्षकों ने जमकर हंगामा किया। तबादलों के मामले में प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए विभिन्न जिलों से आए शिक्षक बैठक स्थल में घुस गए।
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इस दौरान शिक्षकों में आपस में जमकर धक्कामुक्की भी हुई। स्थिति बिगड़ते देख अध्यक्ष करनैल सिंह बैठक छोड़कर चले गए। बाद में कुछ शिक्षकों के मनाने पर वह लौटे।

चार साल से हो रही बैठक
शिक्षक संघ की बैठक में तबादला नीति और प्रदेश कार्यकारिणी के आय-व्यय के ब्योरे में घपले की आशंका पर हंगामे के आसार थे।

रविवार को डायट सभागार में बैठक शुरू हुई तो विभिन्न जिलों के अध्यक्षों, मंत्रियों ने कहा कि शिक्षकों की 16 सूत्री मांगों पर चार साल से बस बैठकें हो रही हैं।
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एक भी मांग अब तक पूरी नहीं हुई। कहा कि बीईओ, डीईओ और कार्यकारिणी पदाधिकारियों को स्कूलों को वर्गीकरण ठीक करने के लिए प्रत्यावेदन देने के बावजूद ऐसा नहीं हुआ।

शिक्षकों ने किया हंगामा
बैठक चल ही रही थी कि अचानक सभागार में कई शिक्षक घुस आए। अनिवार्य तबादले स्थगित कर सिर्फ अनुरोध के आधार पर तबादले करने की मांग पर वे हंगामा करने लगे।

काफी देर बाद प्रांतीय कार्यकारिणी ने इन शिक्षकों को किसी तरह बाहर जाने के लिए मनाया। इसके बाद सभागार को बंद कर बैठक शुरू की गई, जो देर शाम तक बैठक जारी थी।

बैठक में प्रदेश अध्यक्ष करनैल सिंह, महामंत्री सरदार सिंह चौहान, संरक्षक वीरेंद्र सिंह रौतेला, प्रांतीय संयुक्त मंत्री रेणु शर्मा, गढ़वाल मंडल अध्यक्ष राम सिंह चौहान, मंडल मंत्री रमेश पैन्युली, कुमाऊं मंडल संरक्षक सोहन सिंह माजिला, जिलाध्यक्ष नरेंद्र सिंह बिष्ट, जिला मंत्री नागेंद्र पुरोहित आदि मौजूद रहे।

कोषाध्यक्ष ने मांगा अध्यक्ष, महामंत्री का इस्तीफा
राजकीय शिक्षक संघ में ‘घपलों’ की आशंका पर भी घमासान हुआ। प्रदेश कोषाध्यक्ष एकता रस्तोगी ने एक साल बाद भी आय-व्यय का ब्योरा न मिलने पर सवाल उठाया। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को अवैधानिक करार देते हुए प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री से इस्तीफे की मांग की।

और हाथ जोड़ते रह गए प्रदेश अध्यक्ष
हंगामा बढ़ता देख प्रदेश अध्यक्ष करनैल सिंह शिक्षकों के बीच आकर उन्हें समझाते रहे। वह कमरे में घुस आए शिक्षकों से बार-बार हाथ जोड़कर बाहर जाने को कहते रहे। कहा कि अगर वे नहीं गए तो वह खुद बैठक छोड़कर चले जाएंगे।

नेता बोले, ‘हमें पिटना नहीं है’
हंगामे के बीच कुछ शिक्षक नेताओं का कहना था कि वे तबादलों पर कोई राय नहीं देना चाहते। उनका कहना था कि इस मसले पर जुबान खोली और कुछ अलग बात निकल गई तो जत्थे बनाकर भीतर घुसे शिक्षक उनके साथ मारपीट कर सकते हैं।

जिलाध्यक्षों ने की इस्तीफे की पेशकश
प्रांतीय कार्यकारिणी के रवैये से नाराज चमोली के जिलाध्यक्ष कमल किशोर डिमरी ने इस्तीफे की पेशकश की। इस पर कई अन्य जिलाध्यक्ष और मंत्री भी उनके समर्थन में आ गए। उन्होंने कहा कि सभी सामूहिक रूप से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन कुछ देर बाद मामला शांत हो गया।
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