उत्तराखंड के 71 फीसदी भूभाग में जंगल हैं। यहां राजाजी नेशनल पार्क, शिवालिक एलीफेंट कॉरिडोर और आरक्षित जंगलों से होकर रेल ट्रैक गुजरता है।
हर साल ट्रेनों की चपेट में आने से कई हाथियों, बाघों और तेंदुओं की मौत हो जाती है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सालाना करीब चार वन्य जीवों की यहां ट्रेन की चपेट में आने से अकाल मौत होती है। अब वन विभाग इस समस्या से निपटने के लिए एनिमल डिटेक्शन सिस्टम (एडीएस) लगाने की तैयारी में जुटा है। विभाग जंगल से गुजरने वाली ट्रेनों का सर्वे कर रहा है। इसी आधार पर सिस्टम तैयार किए जाएंगे। इसकी कीमत तकरीबन 30 लाख रुपये है।
सिस्टम ऐसे बचाएगा वन्य जीवों की जान
ट्रेन के फ्रंट पर नाइट विजन वाइड एंगल फ्रेम का कैमरा लगाया जाएगा। इस कैमरे से जुड़ी स्क्रीन का मॉनीटर लोको पायलट रूम में होगा। रेलवे ट्रैक पर जब वन्य जीव आएगा तो कैमरा लेजर बीम के जरिए वन्य जीव का चित्र मानीटर पर दिखाएगा। वन्य जीव को देखते ही लोको पायलट हॉर्न बजाएगा। इसके अलावा, पायलट के पास ब्रेक लगाने का भी समय होगा।
ये होंगी विशेषताएं
- रात में देखने के लिए एचडी नाइट विजन कैमरा
- ट्रैक के अलावा आसपास का क्षेत्र भी होगा कवर
- अधिक दूरी (अधिकतम 50 किमी) तक देखने के लिए उच्च क्षमता का लेंस
- बेहतर इमेज के लिए एसडी मॉनीटर
ये होंगे फायदे
- समय से वन्य जीव दिखने पर ब्रेक लगाने का समय मिलेगा, ट्रेन पलटने का खतरा खत्म
- वन्य जीव के सामने होने पर हॉर्न बजाने जैसी सावधानियां बरत सकते हैं
2009 से लेकर 2017 तक 120 हाथियों की मौत
इस साल अब तक तराई केंद्रीय वन प्रभाग के अंतर्गत ट्रेन की चपेट में आने से दो हाथियों की मौत हो चुकी है। वहीं, इस साल असम में ट्रेन की चपेट में आने से अब तक पांच हाथियों की मौत हो चुकी हैं। 2009 से लेकर 2017 तक 120 हाथियों की मौत हो चुकी है।
हाथियों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत
साल संख्या
2016 16
2017 12
2018 अब तक 7
क्यों होते हैं हादसे
वन विभाग के मुताबिक ट्रेन जंगल से गुजरने के दौरान एक गति में चल रही होती है। वन्य जीव एकदम सामने आने पर लोको पायलट चाहकर भी ब्रेक नहीं लगा सकता है क्योंकि ऐसा करने पर बोगियों का एक दूसरे पर चढ़ने का खतरा रहता है।
‘ट्रेनों में एनिमल डिटेक्शन सिस्टम लगाने की योजना है। इसमें ट्रेन चालक को समय रहते वन्य जीव दिखाई देगा। चालक समय रहते ब्रेक लगाने, हॉर्न बजाने की सावधानियां बरत सकता है। इससे वन्य जीव और ट्रेन दोनों ही सुरक्षित रहेंगे।’
- डॉ. पराग मधुकर धकाते (निदेशक जिम काबेर्ट नेशनल पार्क)