प्रदेश सरकार के उपक्रम तराई बीज विकास निगम (टीडीसी) में गेहूं बीज विक्रय घोटाले में दस अफसर दोषी पाए गए हैं। मामले की जांच कर रही चार सदस्यीय टीम ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी दी हैं। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने यूपी और बिहार में वितरकों को भेजे गए बीज को कई दिनों से स्टोर में रखा।
बाद में बीज को खराब बता कर 30 प्रतिशत छूट और 40-40 किलो के दो बैग के साथ एक फ्री स्कीम बना कर वितरकों को बेच दिया। जिससे टीडीसी को 16 करोड़ रुपये की चपत लगी। सोमवार को कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया। साथ ही टीडीसी के प्रबंध निदेशक को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि वे एसआईटी जांच के लिए भी मुख्यमंत्री से अनुरोध करेंगे।
इन्हें पाया गया दोषी
घोटाले में अहम भूमिका निभाने वाले चीफ इंजीनियर एवं इंचार्ज मार्केटिंग पीके चौहान को 30 जून को सेवानिवृत्त होने से पहले ही सरकार ने 24 जून को निलंबित कर दिया था। इसके अलावा इस मामले में उप मुख्य विपणन अधिकारी गंगा सिंह बिष्ट, कंपनी सचिव आरके निगम, बीज उत्पादन अधिकारी दीपक पांडेय, उप मुख्य विपणन अधिकारी एके लोहनी, अजीत सिंह, मुख्य वित्त अधिकारी बीडी तिवारी, प्रशासनिक अधिकारी शिव मंगल त्रिपाठी, लेखाकार पीसी तिवारी और अतुल पांडेय को दोषी पाया गया।