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उत्तराखंड: टीबी उन्मूलन को पलीता, 2017 के मुकाबले वर्ष 2018 में बढ़े 6,265 रोगी

Mon, 04 Feb 2019 03:04 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राजीव शुक्ला, अमर उजाला, हल्द्वानी
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Tuberculosis
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प्रधानमंत्री वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने की बात कर रहे हैं, लेकिन टीबी रोगियों की बढ़ती संख्या टीबी उन्मूलन के कार्यक्रम को ठेंगा दिखा रही है।

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टीबी रोगियों को चिह्नित करने और उन्हें इलाज के दौरान भोजन पोषण सहायता राशि कार्यक्रम शुरू किया था। इसके तहत मरीजों को प्रत्येक माह पांच सौ रुपये के हिसाब से भुगतान बैंक खाते में होना है। निजी डॉक्टरों को टीबी मरीजों की जानकारी सीएमओ और जिला क्षय रोग अधिकारी को देनी है। निक्षय पोर्टल पर भी मरीज का विवरण देना है। टीबी रोगी चिह्नित करने पर पांच सौ रुपये और इलाज पूरा करने पर पांच सौ रुपये प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।

वहीं, हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में टीबी मरीजों की संख्या में खासी वृद्धि हुई है। अन्य जिलों में भी टीबी मरीजों की संख्या कम नहीं हुई है। अप्रैल 2018 से शुरू हुई भोजन पोषण सहायता राशि के तहत दिसंबर 18 तक 11,046 टीबी मरीजों को 01 करोड़ 33 लाख 39 हजार रुपये दिए जा चुके हैं, जबकि कुल पात्रों की संख्या 19,907 हैं और महज 12,814 ने ही अपने बैंक खाते का विवरण दिया है। 
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जिला         मरीजों की संख्या 2018  मरीजों की संख्या 2017
अल्मोड़ा           1753                     1367 
बागेश्वर           733                      572 
चमोली             1103                     860
चंपावत            731                       570
देहरादून          4788                     3737
पौड़ी            1935                     1510 
हरिद्वार          5432                     4239 
नैनीताल         2693                     2101 
पिथौरागढ़        1370                     1069 
रुद्रप्रयाग         668                       521 
टिहरी            1738                     1356
ऊधमसिंह नगर 4647                   3626 
उत्तरकाशी      929                      725 

लक्ष्य हासिल करने का प्रतिशत भी घटा
वर्ष 2017 में टीबी रोगियों की संख्या 22,255 थी। पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर को मिलाकर 17,579 मरीजों का इलाज किया गया, जबकि 4,676 मरीज नहीं मिल सके। वर्ष 2018 में 28,520 टीबी मरीजों को चिह्नित किया गया और 21,783 मरीजों का इलाज किया गया, जबकि 6,737 मरीजों का पता नहीं लग सका। वर्ष 2017 में 79 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया था जो वर्ष 2018 में घटकर 76 प्रतिशत रह गया। 
 
टीबी मरीजों की पूर्ण जानकारी नहीं मिल पा रही है। कई मरीज बीच में इलाज छोड़कर चले जा रहे हैं। ऐसे मरीजों को खोजने में परेशानी हो रही है। प्रयास किया जाएगा कि इस वर्ष लक्ष्य हासिल करने का प्रतिशत बढ़े, साथ ही टीबी मरीजों की संख्या में कमी आए।
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-डॉ. विनोद काला, राज्य क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी

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