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टैक्सी ड्राइवर ने बना डाली ऐसी वेबसाइट, जिसे देखकर आईआईटीयन भी देंगे शाबाशी

Sat, 10 Mar 2018 10:43 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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‘पेशे से टैक्सी ड्राइवर, सोच आईआईटीयन जैसी’ अनुज पर यह जुमला बिल्कुल फिट बैठता है। ड्राइवर के लिए अक्सर उनके पास कॉल आती, इससे उन्हें आइडिया आया और उन्होंने कॉल टू ड्राइवर्स  वेबसाइट बना डाली।

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उन्हें लगा कि फोन पर तो उनको जानने वाले ही संपर्क कर सकते हैं, वेबसाइट के मार्फत हर जरूरतमंद, ड्राइवर की सेवाएं प्राप्त कर सकता है। इस वेबसाइट का अपना एक रेवन्यू मॉडल भी है, जो उत्तराखंड में ड्राइवरों को काम के मौके देगा और अनुज  को कमाई का नया साधन। अनुज, अपने इस प्रोजेक्ट को स्टार्टअप के तौर पर खड़ा करना चाहते हैं।

बातूनी किस्म के अनुज को प्रधानमंत्री मोदी की बातें बहुत अच्छी लगती हैं। टैक्सी में सफर करने वालों से वे मौका पाते ही  मेक इन इंडिया, स्टार्टअप जैसे विषयों पर बात करते हैं।  पिछले करीब 11 वर्षों से पहाड़ पर ड्राइविंग कर रहे अनुज ने देखा कि मैदानी इलाकों से आने वाले लोग अक्सर पहाड़ में गाड़ी चलाने में परेशानी महसूस करते हैं।
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वे खुद की गाड़ी पर पहाड़ का सफर करना चाहते हैं लेकिन ड्राइविंग के डर के चलते ऐसा नहीं कर पाते। कुछ लोग रिस्क लेकर ड्राइविंग करते हैं और कई बार दुर्घटना का शिकार भी बन जाते हैं। कई बार ऐसी घटनाओं से सामना होने के बाद अनुज के मन में विचार आया कि क्यों न उन लोगों के लिए एक्सपर्ट ड्राइवर उपलब्ध कराए जाएं। ड्राइवर के लिए लोगों की कॉल और ऐसी कई घटनाओं के बीच उनके मन में  ‘कॉल टू ड्राइवर्स ’ का अंकुर पनपा।

‘कॉल टू ड्राइवर्स’ वेबसाइट के आइडिया के कई हिस्सों को उन्होंने विभिन्न यात्रा के दौरान अपनी बातों में दिलचस्पी लेने वाले यात्रियों से साझा किया। फिर इस आइडिया को उन्होंने हकीकत में बदल दिया।
 

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anuj
साइट उन्होंने वेबसाइट डेवलपर के मार्फत तैयार करवाई, मगर नाम से लेकर देय सुविधाओं के प्रारूप तक का चयन खुद किया है। अब वे साइट के प्रमोशन के लिए परेशान घूम रहे हैं। उनसे बात करिये तो वे अब गूगल पर साइट का प्रमोशन कैसे होगा? जैसी बातें करते हैं। जितने पैसे जुटाए थे, अब तक सब खत्म हो चुके हैं। सोचा, बैंक से मदद ले लें। वे कई बैंकों में भटके, मगर निराशा ही हाथ लगी।

उनसे बात हुई तो वे कहने लगे, ये बैंक वाले मोदी जी को फेल करवा कर दम लेगें। अब मोदी जी योजनाएं बनाते रहें, पैसा देते रहें, मगर जब जरूरतमंद तक वह पहुंचेगा ही नहीं तो फायदा क्या? खैर, वे ऐसी बातों से हतोत्साहित नहीं हैं, कहते हैं कि जब बात यहां तक पहुंच गई है तो और बहुत आगे तक जाएगी।

पूरे देश में ड्राइवर हायर करने के लिए ऐसी कोई वेबसाइट नहीं है। उनकी यह वेबसाइट ड्राइवर के जरूरतमंदों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। वे कहते हैं कि  ग्राहकों के साथ-साथ इस वेबसाइट से ड्राइवरों को भी फायदा होगा। ग्राहकों को जहां ड्राइवर के लिए अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ेगा, वहीं ड्राइवरों को भी घर बैठे बुकिंग मिल जाएगी।

इस सेवा में केवल उन्ही ड्राइवरों को शामिल किया जा रहा है, जिन्हें पहाड़ में गाड़ी चलाने का अच्छा अनुभव हासिल है। इन दिनों वे ड्राइवरों का डाटा जुटाने में लगे हैं। उनका मानना है कि ड्राइवरों की जरूरत पूरी करने के लिए  उन्हें बड़े पैमाने पर युवकों को ड्राइविंग की ट्रेनिंग देकर तैयार करना पड़ेगा।
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