साइट उन्होंने वेबसाइट डेवलपर के मार्फत तैयार करवाई, मगर नाम से लेकर देय सुविधाओं के प्रारूप तक का चयन खुद किया है। अब वे साइट के प्रमोशन के लिए परेशान घूम रहे हैं। उनसे बात करिये तो वे अब गूगल पर साइट का प्रमोशन कैसे होगा? जैसी बातें करते हैं। जितने पैसे जुटाए थे, अब तक सब खत्म हो चुके हैं। सोचा, बैंक से मदद ले लें। वे कई बैंकों में भटके, मगर निराशा ही हाथ लगी।
उनसे बात हुई तो वे कहने लगे, ये बैंक वाले मोदी जी को फेल करवा कर दम लेगें। अब मोदी जी योजनाएं बनाते रहें, पैसा देते रहें, मगर जब जरूरतमंद तक वह पहुंचेगा ही नहीं तो फायदा क्या? खैर, वे ऐसी बातों से हतोत्साहित नहीं हैं, कहते हैं कि जब बात यहां तक पहुंच गई है तो और बहुत आगे तक जाएगी।
पूरे देश में ड्राइवर हायर करने के लिए ऐसी कोई वेबसाइट नहीं है। उनकी यह वेबसाइट ड्राइवर के जरूरतमंदों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। वे कहते हैं कि ग्राहकों के साथ-साथ इस वेबसाइट से ड्राइवरों को भी फायदा होगा। ग्राहकों को जहां ड्राइवर के लिए अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ेगा, वहीं ड्राइवरों को भी घर बैठे बुकिंग मिल जाएगी।
इस सेवा में केवल उन्ही ड्राइवरों को शामिल किया जा रहा है, जिन्हें पहाड़ में गाड़ी चलाने का अच्छा अनुभव हासिल है। इन दिनों वे ड्राइवरों का डाटा जुटाने में लगे हैं। उनका मानना है कि ड्राइवरों की जरूरत पूरी करने के लिए उन्हें बड़े पैमाने पर युवकों को ड्राइविंग की ट्रेनिंग देकर तैयार करना पड़ेगा।