यह था मामला
मामले के अनुसार ज्योति काला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य में टैक्सी बिल घोटाला 2009 और 2013 में सामने आया था। इन वर्षों में मुख्यमंत्रियों की फ्लीट में विभाग ने बाहर से गाडि़यां मंगाई और 1 करोड़ 38 लाख के बिल बनाकर उनका पैसा निकाल लिया गया। 2015 में इस मामले में तत्कालीन सीएमओ की ओर से देहरादून के डालनवाला कोतवाली देहरादून व ऋषिकेश में एफआईआर दर्ज की गई और काला टूर ऑपरेटर व उनियाल टूर ऑपरेटर को आरोपी बनाया गया।
आरोप लगाया गया था कि इन लोगों ने फर्जी बिल बनाकर पैसा लिया। आरोप था कि करीब 22 लाख काला टूर एंड़ ट्रेवलर्स ने लिया व पांच लाख का भुगतान उनियाल टूर को किया गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों हाईकोर्ट आए तो इसी दौरान पुलिस ने इनके खिलाफ चार्जशीट फाइल कर दी। चार्जशीट को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की और आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट में इन दोनों टूर ऑपरेटरों ने कहा कि जो भी बिल उन्होंने निकाले वो सीएम कार्यालय से सत्यापित थे। इसलिए उन्होंने कोई फर्जी बिल पेश नहीं किए थे।