सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में जालसाजों के गिरोह ने 12 साल की अवधि में बैनामों और गिफ्ट डीड में छेड़छाड़ की है। वर्ष 1978 से 1990 के बीच इन बैनामों के दस्तावेज से कई पेपर फाड़कर उनके स्थान पर फर्जी दस्तावेज चिपका दिए गए। इस दरम्यान के सैकड़ों बैनामों की जांच की जानी है। पुलिस जल्द ही इसमें बड़ी कार्रवाई कर सकती है।
बता दें कि पिछले दिनों जनसुनवाई कार्यक्रम में आए एक प्रकरण के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के सामने चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। पता चला था कि जिले में बहुत सी ऐसी जमीनें हैं जिनके मालिकों ने वर्षों से उनकी तरफ नहीं देखा है। इसी का फायदा उठाकर भूमाफिया ने अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ गठजोड़ कर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया है। यह मामला सामने आने के बाद चार पुराने बैनामों की जांच कराई गई तो सभी भौचक्के रह गए।
किसी ने किसी का मुख्तारेआम बताकर दूसरे को बैनामा कर दिया तो कई बैनामे ऐसे पाए गए कि मालिक विदेशों से बाहर नहीं आए और इस दरम्यान उन्होंने जमीनें बेच भी दीं। इस तरह कमेटी की जांच में आए तथ्य के आधार पर शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। इस जांच रिपोर्ट में एआईजी निबंधन की ओर से पुलिस को वर्ष 2000 से अब तक दोनों सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में तैनात रहे नौ सब रजिस्ट्रार और 28 लिपिकों के नाम भी सौंपे गए हैं।
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ऐसे में अब जांच इन अधिकारियों तक भी पहुंचेगी। इस बीच जांच में यह भी पाया गया है कि जिन बैनामों में छेड़छाड़ की गई है या किए जाने की आशंका है वह सब वर्ष 1978 से 1990 के बीच किए गए हैं। इस दरम्यान के सभी बैनामों की एक बार फिर से पुलिस भी जांच करेगी। जांच कमेटी ने माना है कि इस काम में इन अधिकारियों के अलावा रखरखाव करने वाले कर्मचारी, माफिया और कुछ सलाहकार भी शामिल हो सकते हैं।
राजस्व अधिकारियों के साथ टीम बनाने पर विचार
पुलिस सामान्य तौर पर इस तरह के फर्जीवाड़ों की जांच करती आई है। लेकिन, यहां एक साथ कई मामले हो सकते हैं।संख्या सैकड़ों तक पहुंचने की भी आशंका है। ऐसे में पुलिस अधिकारी इसकी जांच के लिए मुख्य विवेचना अधिकारी के साथ राजस्व अधिकारियों को मिलाकर टीम बनाने पर विचार कर रहे हैं। जल्द ही पुलिस की ओर से जिलाधिकारी को पत्र भी भेजा जा सकता है।