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डब्ल्यूआईसी में दिखी ‘टोपी की दास्तान’

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देहरादून। डॉ. राही मासूम रजा के उपन्यास ‘टोपी शुक्ला’ पर आधारित नाटक टोपी की दास्तान का रविवार को डब्ल्यूआईसी सभागार में मंचन किया गया। नाटक में व्यंग्यात्मक अंदाज में देश की सामाजिक व्यवस्था को मंचित किया गया।
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विंग्स कल्चरल सोसायटी दिल्ली के डायरेक्टर तारिक हमीद ने बताया कि भारत में टोपियों की कहानी बहुत रोचक है। टोपी से पहचान होती है कि वह किस वर्ग या पार्टी और समुदाय से ताल्लुक रखता है, लेकिन अभी तक कोई ऐसी टोपी नहीं बनी जिसे पहनकर कोई सिर्फ हिंदुस्तानी लगे। डॉ. राही ने यह उपन्यास 60 के दशक में लिखा था। एक पात्र टोपी शुक्ला के जीवन चरित्र से उस वक्त की व्यवस्था को बताया था। डब्ल्यूआईसी की प्रेसिडेंट नाजिया इज्जुद्दीन ने कहा कि इस तरह के आयोजन से देश संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। नाटक में प्रदीप वाजपेयी, मनी पुरोहित, रोचना मोरे, अबु यूसुफ, विवान सम्राट में आदि कलाकार शामिल रहे।
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