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सांप के सबसे बड़े दुश्मन की भाषा को बखूबी समझती हैं स्विटजरलैंड की ये वैज्ञाानिक, बताई रोचक बातें

Tue, 10 Oct 2017 08:29 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
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सांप के सबसे बड़े दुश्मन की भाषा को स्विटजरलैंड की ये वैज्ञाानिक बखूबी समझती हैं। अन्तरराष्ट्रीय कांफ्रेंस में उन्होंने इससे जुड़ी कई रोचक बातें बताई। गुरुकुल कांगड़ी विवि के तत्वावधान में आयोजित छह दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय कांफ्रेंस के दूसरे दिन संयोजक प्रो. दिनेश भट्ट ने दो सिम्पोजियम तथा एक पोस्टर सेशन आयोजित किए। स्विटजरलैंड की विश्व प्रसिद्ध जैव-संवाद विज्ञानी मारता मानसर ने नेवलों पर किए अपने शोध कार्य प्रस्तुत किया।  
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मारता मानसर ने कहा कि मैं शोध के दौरान नेवलों के जितने नजदीक पहुंची, मैंने उतना ही अधिक उन्हें समझा। उनकी भाषा को समझना बड़ा कठिन होता है, मगर अब मुझे उनकी भाषा भी समझ आने लगी है।

नेवला एक ऐसा जीव है जो साधारण रूप से दूसरों पर हमला नहीं करता। जब कोई उस पर हमला करता है, तभी वह अपने पराक्रम का परिचय देता है। आज भी मैं नेवलों के काफी नजदीक शोध कार्य कर रही हूं। यूनाइटेड किंगडम के प्रसिद्ध जैव-विज्ञानी प्रो. डेविड रेबी ने स्तनधारी संवाद से जुड़ी ‘सोर्स-फिल्टर थ्योरी’ प्रस्तुत की।
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स्तनधारियों से संवाद होता है जटिल

प्रो. रेबी ने स्तनधारियों के संवाद तंत्र पर विचार रखते हुए बताया कि जीवों में बातचीत करने की क्षमता का विकास एक जटिल प्रक्रिया है। जिसे जन्तु के संवाद को कृत्रिम तरिके से तैयार करके ‘प्लेबैक एक्सपेरिमेंट’ के माध्यम से समझा जा सकता है।

प्रो. रेबी ने कहा कि स्तनधारी जीवों के ध्वनि संवादों में जीव के आकार से जुड़ी जानकारियां छिपी होती है तथा विज्ञान अब उन गूढ़ जानकारियों को समझने में सक्षम हो गया है। मात्र आवाज की आवृत्ति को सुनकर एक जीव दूसरे जीव को बिना देखे ही उसके आकार का अंदाजा लगा सकता है तथा निर्णय ले सकता है कि उसे इस जीव से लड़ना चाहिये या नहीं।

मानवीय संवाद पर चर्चा करते हुए आयोजित एक विशेष सत्र की अध्यक्षता करते हुए सुसेक्स विश्वविद्यालय इंग्लैण्ड की प्रोफेसर कटार जायना ने कहा कि मानवीय संवेदना के साथ जो संवाद किया जाता है उसका परिणाम लम्बे समय के बाद देखने को मिलता है। संवाद हमें यह बताता है कि मानवीय हलचल जीवों में भी होती है। बल्कि वह अपना प्रदर्शन अलग-अलग ढ़ंग से करते हैं।
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कुत्तों को निर्देशित किये जाने की मैकेनिज्म पेटर्न

फ्रांस के वैज्ञानिक निकोलस मेथेवन ने अपना प्रस्तुतीकरण इंसानों के द्वारा कुत्तों को निर्देशित किये जाने की मैकेनिज्म पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य कुत्तों को निर्देश देते समय उसी वोकल पेटर्न का प्रयोग करता है जो वह अपने बच्चो से संवाद स्थापित करने में करता है। 

उन्होंने अपने शोध में यह खुलासा किया है कि प्रोफेसर मेथेवन ने युवा वर्ग के कुत्ते के पिल्ले, युवा एवं यूनाइटेड किंगडम की डॉ. जूलिया सिमरन तथा डॉ. जूलियन मेयर ने भी अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।  

सत्र में ब्राजील की जैव संवाद वैज्ञानिक डॉ. वरजोला ओलिविया ने चूहों के प्रणय संवाद पर अपना शोध कार्य प्रस्तुत किया। कांफ्रेस में पोस्टर सेशन के अन्तर्गत कुल चालीस पोस्टर प्रस्तुत किए गए। जिसमें आठ भारतीय प्रतिभागियों सहित जर्मनी, अमेरिका, रशिया, पौलेण्ड, मेक्सिकों, ब्राजील, स्पेन, फ्रांस, न्यूजीलैण्ड आदि देशों के 32 प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति दी। इस अवसर पर डॉ. गगन माटा, डॉ. राकेश भुटयानी, डॉ. नितिन कम्बोज, डॉ. विनोद, डॉ. विनय सेठी, डॉ. संतोष शर्मा, डॉ. अमर सिंह, रॉबिन राठी इत्यादि उपस्थित थे।
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