स्वाइन फ्लू के मामले में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। वायरल होने के कारण इसके प्रारंभिक लक्षण अन्य सामान्य मौसमी बीमारियों की तरह होते हैं। इसलिए इसकी पहचान आसानी से नहीं होती। ऐसे मामलों में चिकित्सक तुरंत उपचार शुरू करने का परामर्श देते हैं।
स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से अस्पतालों को एडवाइजरी जारी की गई है। सभी अस्पतालों को आइसोलेशन वार्ड बनाने और संदिग्ध मरीजों की सूचना तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
चिकित्सकों के अनुसार अगर समय पर उपचार शुरू किया जाए तो स्वाइन फ्लू से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। साथ ही कुछ सावधानियां बरत स्वाइन फ्लू से बचाव किया जा सकता है। शुरुआती चरण में मरीज को दवा की जरूरत नहीं होती। शरीर जमा प्रतिरोधक क्षमता का इस्तेमाल बीमारी से निपटने में करता है, लेकिन इसके बाद अगर बीमारी पर नियंत्रण नहीं हुआ तो रोग जानलेवा साबित हो सकता है।
- लगातार नाक बहना और छींकें आना।
-लगातार खांसी और बहुत अधिक बलगम।
- सिर में बहुत तेज दर्द।
- बहुत ज्यादा थकान, अनिद्रा।
- मांसपेशियों में अकड़न और दर्द।
- गले में खुश्की और खरास।
- लगातार बुखार बढ़ना।