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कोरोना की दहशत के बीच स्वाइन फ्लू की दस्तक, देहरादून में आठ मरीजों में पुष्टि से हड़कंप 

Wed, 26 Feb 2020 09:46 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • स्वास्थ्य विभाग ने पिछले और इस माह लिए 52 मरीजों के सैंपल
  • उपचार के बाद ज्यादातर मरीजों को मिल चुकी छुट्टी
  • पीड़ितों के परिजनों का सैंपल लेने घर पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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कोरोना वायरस की दहशत के बीच राजधानी के आठ मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने से हड़कंप मच गया। हालांकि इनमें से ज्यादातर मरीजों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। वहीं, स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पीड़ितों के परिजनों के सैंपल लेने का प्रयास कर रही है। 
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स्वास्थ्य विभाग ने पिछले दो माह के दौरान स्वाइन फ्लू के संदिग्ध लक्षणों वाले 52 मरीजों के सैंपल लिए। इन्हें जांच के लिए नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) दिल्ली भेजा गया था। जांच रिपोर्ट में नौ मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। सीएमओ डा. मीनाक्षी जोशी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि अधिकांश मरीज इलाज के बाद ठीक होकर घर लौट चुके हैं। इसमें तीन दूसरे राज्यों के मरीज शामिल थे, जिनका राज्य के अलग-अलग अस्पतालों में उपचार किया गया। पांच उत्तराखंड के ही मरीज थे। 

वहीं, मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पीड़ितों के घर जाकर परिजनों के सैंपल लिए। स्वाइन फ्लू संक्रामक रोग होने के कारण परिवार वालों के भी इससे पीड़ित होने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा विभागीय अधिकारियों ने लोगों को बीमारी से बचाव और उपचार के संबंध में भी जानकारी दी।
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ये लक्षण दिखें तो अनदेखी न करें

स्वाइन फ्लू के मामले में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। वायरल होने के कारण इसके प्रारंभिक लक्षण अन्य सामान्य मौसमी बीमारियों की तरह होते हैं। इसलिए इसकी पहचान आसानी से नहीं होती। ऐसे मामलों में चिकित्सक तुरंत उपचार शुरू करने का परामर्श देते हैं।

स्वाइन फ्लू के मामले सामने आने के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से अस्पतालों को एडवाइजरी जारी की गई है। सभी अस्पतालों को आइसोलेशन वार्ड बनाने और संदिग्ध मरीजों की सूचना तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

चिकित्सकों के अनुसार अगर समय पर उपचार शुरू किया जाए तो स्वाइन फ्लू से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। साथ ही कुछ सावधानियां बरत स्वाइन फ्लू से बचाव किया जा सकता है। शुरुआती चरण में मरीज को दवा की जरूरत नहीं होती। शरीर जमा प्रतिरोधक क्षमता का इस्तेमाल बीमारी से निपटने में करता है, लेकिन इसके बाद अगर बीमारी पर नियंत्रण नहीं हुआ तो रोग जानलेवा साबित हो सकता है।

स्वाइन फ्लू के लक्षण

- लगातार नाक बहना और छींकें आना।
-लगातार खांसी और बहुत अधिक बलगम।
- सिर में बहुत तेज दर्द। 
- बहुत ज्यादा थकान, अनिद्रा।
- मांसपेशियों में अकड़न और दर्द।
- गले में खुश्की और खरास।
- लगातार बुखार बढ़ना।
 
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ऐसे करें बचाव 

- खांसी-जुकाम को हल्के में ना लें।
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
- हाथ मिलाने और गले लगने से बचें।
- बिना मास्क पहने भीड़भाड़ में ना जाएं।
- अस्पताल जाते समय सावधानी बरतें।
- स्वाइन फ्लू प्रभावित क्षेत्रों में ना जाएं।
 -खांसते और छींकते समय रुमाल रखें।

स्वाइन फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम के बीच शुरुआत में अंतर नहीं किया जा सकता है। स्वाइन फ्लू बढ़ने पर जानलेवा हो जाता है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए। समय पर उपचार देने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
- डॉ. मीनाक्षी जोशी, सीएमओ
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