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स्वाइल फ्लू को लेकर उत्तराखंड में स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट, जानिए लक्षण और बचाव के तरीके

Sat, 12 Jan 2019 10:06 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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swine flu
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प्रदेश में स्वाइल फ्लू दस्तक दे चुका हैं और स्वास्थ्य विभाग ने भी अपने सभी अस्पतालों को अलर्ट जारी किया है लेकिन सच तो यह है कि हरिद्वार के प्रमुख अस्पतालों में भी इसकी जांच के लिए किट तक उपलब्ध नहीं है। यदि किसी मरीज में स्वाइल फ्लू के प्राथमिक लक्षण दिखाई देते हैं तो सैंपल जांच के लिए कैसे और किसी लैब में भेजे जाने हैं कि इसकी जानकारी भी चिकित्सकों को नहीं है। 

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देहरादून में स्वाइन फ्लू से एक मरीज की मौत हो चुकी है। सर्दी के इस मौसम में स्वाइन फ्लू तेज के साथ फैलता है। इस आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अपने सभी अस्पतालों के लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय से जारी अलर्ट के बाद सीएमओ डा. प्रेम लाल ने सभी अस्पतालों और केंद्रों को अलर्ट रहने को पत्र जारी किया है। साथ ही डाक्टरों को निर्देशित किया है कि मरीज में लक्षण दिखाई देते ही उनकी जांच कराएं।

जांच के साथ ऐसे संभावित मरीजों को भर्ती करने के लिए जिला अस्पताल हरिद्वार और रुड़की के सिविल अस्पताल में 6-6 बेड के आइसोलेशन वार्ड बना दिए हैं। जिला अस्पताल में जांच के लिए एक ओपीडी कक्ष भी अलग से बनवाया गया है। जिला अस्पताल में फिजिशियन डा. संदीप टंडन को मरीजों की जांच के लिए प्रभारी बनाया गया है। सीएमएस डा. राजकुमार ने बताया कि उनके सामने समस्या यह है कि बिना किट के मरीजों की जांच कैसे होगी, सैंपल लेने के लिए कौन आएगा और किस लैब के लिए  भेजा जाएगा, इस संबंध में कोई निर्देश नहीं है।  

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स्वाइन फ्लू के लक्षण व पहचान  

- सामान्य जुकाम और 100 डिग्री तक बुखार होता है।  
- तेज सिरदर्द होता है और अत्यधिक कमजोरी महसूस होने लगती है।  
- भूख कम लगती है और नाक से पानी बहने लगता है।  
- गले में जलन, उल्टी और डायरिया भी हो जाता है।  
- गले में खरास, मांसपेसियों में दर्द, पेट खराब होना। 

क्या है स्वाइन फ्लू  
स्वाइन फ्लू एच वन, एन वन है। यह एक जूनोटिक शूकर इंफ्लूएंजा विषाणु एसआईवी है। यह व्यक्ति से व्यक्ति में फैलने वाली बीमारी है। मरीज को स्वाइन फ्लू की शिकायत होते ही सावधानियां बरतनी शुरू कर देनी चाहिए, ताकि अन्य लोगों में न फैले। डाक्टर संदीप टंडन ने बताया कि यह बीमारी खतरनाक नहीं है, लेकिन सावधानी न बरती जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो जाती है।  
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फैलने के कारण  

यह बीमारी व्यक्ति से व्यक्ति को होती है, जब कोई फ्लू से पीड़ित मरीज छींकता है तो उसके आसपास में मौजूद व्यक्तियों के शरीर में इस स्वाइन फ्लू का वायरस सांस के माध्यम से प्रवेश कर जाता है।

यह रखें सावधानी  
- छींकते समय टिस्यू पेपर से नाक को ढकें और पेपर को दोबारा से प्रयोग न करें।  
- हाथों को लगातार साबुन से धोते रहें। घर के दरवाजे, की-बोर्ड, हेड आदि साफ करते रहें।  
- जुकाम होते ही घर से बाहर न जाएं। 
- लगातार पानी पीते रहे। फेसमास्क का प्रयोग करें।  

इन्हें है अधिक खतरा  
- सांस, मधुमेह, हृदय, यकृत और न्यूरोलोजिकल बीमारी वालों को।  
- गर्भवती महिलाओं को और पांच साल से कम आयु के बच्चों को अधिक खतरा होता है।  
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