- सामान्य जुकाम और 100 डिग्री तक बुखार होता है।
- तेज सिरदर्द होता है और अत्यधिक कमजोरी महसूस होने लगती है।
- भूख कम लगती है और नाक से पानी बहने लगता है।
- गले में जलन, उल्टी और डायरिया भी हो जाता है।
- गले में खरास, मांसपेसियों में दर्द, पेट खराब होना।
क्या है स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू एच वन, एन वन है। यह एक जूनोटिक शूकर इंफ्लूएंजा विषाणु एसआईवी है। यह व्यक्ति से व्यक्ति में फैलने वाली बीमारी है। मरीज को स्वाइन फ्लू की शिकायत होते ही सावधानियां बरतनी शुरू कर देनी चाहिए, ताकि अन्य लोगों में न फैले। डाक्टर संदीप टंडन ने बताया कि यह बीमारी खतरनाक नहीं है, लेकिन सावधानी न बरती जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो जाती है।
यह बीमारी व्यक्ति से व्यक्ति को होती है, जब कोई फ्लू से पीड़ित मरीज छींकता है तो उसके आसपास में मौजूद व्यक्तियों के शरीर में इस स्वाइन फ्लू का वायरस सांस के माध्यम से प्रवेश कर जाता है।
यह रखें सावधानी
- छींकते समय टिस्यू पेपर से नाक को ढकें और पेपर को दोबारा से प्रयोग न करें।
- हाथों को लगातार साबुन से धोते रहें। घर के दरवाजे, की-बोर्ड, हेड आदि साफ करते रहें।
- जुकाम होते ही घर से बाहर न जाएं।
- लगातार पानी पीते रहे। फेसमास्क का प्रयोग करें।
इन्हें है अधिक खतरा
- सांस, मधुमेह, हृदय, यकृत और न्यूरोलोजिकल बीमारी वालों को।
- गर्भवती महिलाओं को और पांच साल से कम आयु के बच्चों को अधिक खतरा होता है।