अजंता होटल में भाई-बहन की मौत के मामले में पुलिस अधिकारियों की जल्दबाजी किरकिरी का कारण बन गई।
घटनास्थल पर जिस तरह पुलिस ने हत्या और खुलासे का दावा ठोका था वह रात होते-होते आत्महत्या की थ्योरी में बदल गया। जल्दबाजी का आलम यह था कि पुलिस ने रात 8.27 बजे इस घटना को डबल मर्डर घोषित कर दिया था। लेकिन, करीब 11 बजे पुलिस अपने दावे से पलट गई और इसे आत्महत्या का मामला करार दे दिया गया। पुलिस अब सफाई दे रही कि होटल कर्मचारियों की गलती की वजह से मामले को लेकर गफलत हुई थी, जो जांच में साफ हो गई।
नई कप्तान की टीम के लिए पहली ही बड़ी घटना अग्निपरीक्षा साबित हुई। मामले को लेकर टीम के बीच समन्वय का अभाव नजर आया। भाई-बहन का शव होटल के जिस कमरे में मिले उसे सील कर बारीकी से उसका निरीक्षण किया गया। जांच के बाद कमरे से बाहर आए अधिकारियों ने इसे सीधे तौर पर डबल मर्डर करार दे दिया।
हत्याकांड को लेकर कई तरह के सवाल किए गए लेकिन गोलमोल जवाब दिए जाते रहे। उस समय अधिकारी यह तक नहीं बता पाए कि कमरा खुला था कि या अंदर से लॉक था। जैसे ही मृतक आलोक गौतम के पिता पुलिस के हाथ आए तो पुलिस ने एक कदम बढ़कर देर रात तक हत्याकांड का खुलासा करने का दावा कर दिया।
आलोक गौतम डिप्रेशन में था...
murder in ajanta hotel
- फोटो : AmarUjala
हालांकि, समय के साथ यह दावा फेल साबित हुआ। पिता से बातचीत में कुछ हाथ नहीं लगा तो पुलिस ने नए सिरे से खुदकुशी की लाइन पर काम करना शुरू किया। देर रात बताया गया कि आलोक गौतम डिप्रेशन में था। बहन की हत्या करने के बाद उसने चाकू से अपना गला काट लिया।
चार बजे खोला था वेटर ने कमरा
कमरा नंबर 305 का दरवाजा लॉक नहीं मिला। सूत्रों का कहना है कि होटल कर्मियों ने कुछ जानकारी लेने के लिए फोन मिलाया था, लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो वेटर को भेजा गया था। डीआईजी पुष्पक ज्योति ने बताया कि शाम करीब चार बजे एक वेटर ने पहले दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी तरह का जवाब नहीं मिला।
इसके बाद उसने मास्टर की से दरवाजा खोला। वेटर अंदर गया तो वहां का नजारा देखकर उसके पैरों तले की जमीन खिसक गई। डर की वजह से वेटर कमरे को लॉक नहीं कर पाया। वेटर ने दूसरे साथी को इसकी जानकारी दी, लेकिन उस समय उसे चुप करा दिया गया। शाम 6 बजे जब कमरा साफ करने वाला आया तो उसने शव देखकर होटल प्रबंधन को जानकारी। इसके बाद ही पुलिस को सूचना दी गई।
बीस दिन में होटल का सवा लाख का भुगतान
money
यूपी के फतेहपुर का गौतम परिवार 28 नवंबर से देहरादून में था। पुलिस जांच पड़ताल में आया है कि होटल में यह परिवार अब तक सवा लाख रुपये का भुगतान कर चुका है। बुधवार को ऐसा क्या हुआ कि दोनों भाई-बहन पिता को छोड़कर दूसरे होटल में आ गए। पुलिस इन सवालों का जवाब तलाशने में जुटी थी।
मध्य प्रदेश के सतना से महेंद्र गौतम अपने बेटे आलोक गौतम और अनामिका के साथ 28 नवंबर को देहरादून पहुंचे थे। तब से यह तीनों शहर के हाईप्रोफाइल होटल में ठहरे थे। महेंद्र एनजीओ से जुडे़ हैं। पत्नी सुमन की अगस्त में कैंसर से मौत हो गई थी। आलोक गौतम के बारे में बताया गया है कि उसका एयरफोर्स में चयन हो गया था।
यह लोग घूमने के इरादे से देहरादून आए थे। महेंद्र गौतम तो उसी होटल में थे, जबकि आलोक छोटी बहन को लेकर दूसरे होटल में आ गया था। पुलिस का कहना है कि होटल का किराया पौने दो लाख के करीब पहुंच गया है। आलोक ने पिता को एयरफोर्स में चयन होने की जानकारी भी गलत दी थी। इस बात को लेकर वह काफी तनाव में था।
होटल में ही मिले पिता
आलोक के पिता महेंद्र गौतम को ढूंढने के लिए पुलिस को ज्यादा कसरत नहीं करनी पड़ी। आलोक के मोबाइल के जरिए पुलिस दूसरे होटल तक पहुंच गई। महेंद्र से लंबी पूछताछ का कोई रिजल्ट सामने नहीं आया है। पिता का कहना है कि एयरफोर्स में चयन होने के बाद बेटा उन्हें घुमाने के लिए यहां लाया था।