शारदा एवं ज्योर्ति पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि शारदा पीठ के वे अकेले शंकराचार्य हैं। उनका अभिषेक द्वारिका में विधिवत हुआ था। अन्य जो संत स्वयं को शंकराचार्य घोषित करते हैं, वे धोखेबाज हैं। हिंदू समाज को ऐसे साधुओं के धोखे में नहीं आना चाहिए।
20 दिनों के प्रवास पर कनखल स्थित मठ पहुंचे शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती रविवार को देर शाम पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूर्व शंकराचार्य अभिनव तीर्थ महाराज ने उनका अभिषेक द्वारिका में उस चबूतरे पर किया था जो शंकराचार्य पद के लिए अधिकृत है।
विधान है कि जो इस चबूतरे पर अभिशिक्त होता है, वही शारदा पीठ का शंकराचार्य बनता है। जो अन्य साधु शंकराचार्य होने का नाटक कर रहे हैं, उनसे हिंदू समाज ही नहीं बल्कि शासन को भी दूर रहना चाहिए। ऐसे स्वयंभू संतों का बहिष्कार अखाड़ा परिषद ने किया है। समाज का दायित्व है कि बहिष्कृत साधुओं के कार्यक्रमों में न तो भाग ले और न आमंत्रित करे।