इसके बाद 11 सितंबर को नमामि गंगे के डायरेक्टर जनरल और नीतिन गड़करी की निजी सचिव भी स्वामी सानंद से मिलने आए थे। उन्होंने एक ड्राफ्ट भी स्वामी सानंद को सौंपा था।
रातभर सानंद उस ड्राफ्ट को पढ़कर उसका जवाब देने की तैयारी करते रहे, लेकिन दोनों अधिकारी वापस लौटकर नहीं आए। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत सहित कईं नेता भी हरिद्वार आए, लेकिन स्वामी सानंद की किसी ने सुध नहीं ली।
सत्ता पक्ष की तरफ से दो दिन पहले स्थानीय सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने जरूर दो दिन पहले हरिद्वार से लेकर देहरादून और दिल्ली तक बड़ी गंभीर पैरवी की। उमा भारती और निशंक के प्रयासों को छोड़ दें तो सरकार की ओर से एक बार भी 112 दिनों में कोई भी गंभीर प्रयास नहीं किया गया।