नवरात्रों में ही चले जाएं प्राण
स्वामी सानंद ने कहा कि गंगा का अवतरण भी तीन पीढ़ियों के तप के बाद हुआ था। मातृसदन में गोकुलानंद और निगमानंद सरस्वती गंगा के लिए अपने प्राण त्यागी चुके हैं। यदि उनकी मृत्यु के बाद गंगा को न्याय मिलेगा तो वे चाहेंगे कि नवरात्रों में ही उनके प्राण चले जाएं।
शिवानंद बैठेंगे अनशन पर
सानंद के प्राण त्यागने की बात कहते ही स्वामी शिवानंद भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद की मृत्यु होना स्वतंत्र भारत के लिए सबसे बड़ा अभिशाप होगा। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन ने स्वामी निगमानंद को मारने का षड्यंत्र रचा। उन्होंने कहा कि जल त्यागने के बाद जिस दिन स्वामी सानंद की मृत्यु होगी उसी दिन से वे स्वयं आमरण अनशन शुरू करेंगे।