सरकार पर अनशन के साथ ही गंगा की भी अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गंगा की रक्षा के लिए बिलकुल भी गंभीर नहीं है। देहरादून में हुए प्रधानमंत्री इन्वेस्टर्स समिट के दौरान सामने आए प्रस्तावों की चर्चा करते हुए स्वामी सानंद ने कहा कि प्रधानमंत्री को यह बताना चाहिए कि वह केवल विकास के लिए उद्योग ही लगाने के पक्षधर हैं।
या फिर विकास की अंधी दौड़ के बीच हिमालय का देवत्व, गंगा का गंगतत्व और उत्तराखंड की आध्यात्मिकता बचाने का भी उनका इरादा है। उन्होंने कहा कि पूरे एजेंडे में गंगा और देवभूमि को बचाने का प्रयास कही भी दिखाई नहीं देता। स्वामी सानंद गंगा के लिए विशेष कानून बनाने की मांग को लेकर 22 जून से मातृसदन परिसर में आमरण अनशन कर रहे हैं।
इस मौके पर मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि जल त्याग देने से यदि स्वामी सानंद का महाप्रयाण हो जाता है। तो नवरात्र के बाद वे भी आमरण अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार को धोखेबाजों की सरकार बताया।