साथ ही इस पर विचार कर नई व्यवस्था लागू की जाएगी। सांसद निशंक देर शाम इस अधिसूचना की प्रति लेकर मातृसन पहुंचे। जहां स्वामी सानंद ने इसे खारिज कर दिया। उनका कहना था कि उनका इस अधिसूचना से कोई सरोकार नहीं है।
सांसद निशंक उन्हें अनशन खत्म करने के लिए मनाते रहे। मगर देर शाम प्रो. जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद ने जल भी त्याग दिया। हालांकि उन्होंने कहा कि यदि उनके शरीर में अंतिम सांस रहने तक उनकी मांगों पर ठोस कदम उठाया जाता है तो वह अनशन खत्म कर सकते हैं।
इस दौरान स्वामी शिवानंद सरस्वती ने केंद्र और राज्य सरकार मामले में गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि प्रोफेसर जीडी अग्रवाल को कुछ हो जाता है तो केंद्र की मोदी सरकार को प्रकृति दंड देगी।
प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने मंगलवार से ही जल त्यागने की घोषणा कर दी थी। घोषणा के अनुसार वे दोपहर को जल त्यागने वाले थे। परंतु निशंक के आश्वासन पर उन्होंने अपनी घोषणा को बुधवार सुबह सवा सात बजे तक टाल दिया था। मगर देर शाम अचानक उन्होंने फैसला बदलते हुए शाम को ही जल त्याग दिया।