मातृसदन ने इसी दिन एम्स के निदेशक को पत्र लिखकर लोगों के अंतिम दर्शन के लिए और स्वामी सानंद के शरीर को कुछ समय के लिए देने का आग्रह किया था, लेकिन एम्स ने पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। मातृसदन के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने स्वामी सानंद का शरीर लेने के लिए 22 अक्तूबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने आठ घंटे के भीतर स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को मातृसदन में लाने का आदेश दिया।
शुक्रवार को दिनभर मातृसदन और गंगा भक्तों की नजरें ऋषिकेश एम्स की तरफ लगी रही, लेकिन उनके पार्थिव शरीर को देरशाम तक भी नहीं लाया गया। ऋषिकेश कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रितेश शाह ने बताया कि इस संबंध में अभी कोई आदेश नहीं मिले हैं।
हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि शरीर लाने के बारे में वह अभी किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन हाईकोर्ट का आदेश स्वागत योग्य है। अब स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को मातृसदन लाने का काम प्रशासन का है।