मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने बताया कि सांसद रमेश पोखरियाल निशंक सानंद से वार्ता के लिए नौ अक्तूबर को मातृसदन आए। जिसके बाद स्वामी सानंद वार्ता में व्यस्त होने के कारण स्नान और यज्ञ नहीं कर सके।
जिस कारण उन्होंने शाम को बिना स्नान और यज्ञ करे ही जल त्याग दिया। स्वामी शिवानंद ने बताया कि सानंद ने एक बार इच्छा जाहिर की थी कि मरणोपरांत उनके शहरी को गंगा में स्नान कराया जाना चाहिए।
जिसके लिए ही मातृसदन ने शुक्रवार को एम्स के निदेशक को पत्र लिखकर तीन दिन के लिए सानंद का शरीर मांगा, लेकिन निदेशक ने पत्र का कोई जवाब नहीं दिया। जिसका कारण स्वामी सानंद की अंतिम इच्छा अधूरी रह गई।
स्वामी ज्ञानस्वरूप सांनद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के गंगा प्रेम की कहानी वर्ष 1949 में शुरू हुई थी। जब उनके मित्र की आंखों की बीमारी दस दिनों तक गंगा जल की बूंदे डालने से ठीक हो गई।
स्वामी सानंद का एक वीडियो से सामने आया कि वर्ष 1949 में वह अपने स्कूल के दिनों में बनारस में थे। उस दौरान उनके एक मित्र की आंखों में किसी प्रकार की बीमारी हो गई। जिसके उपचार के लिए वह एक वैद्य के पास गए।
वैद्य ने चिंता न करने की सलाह देते हुए दस दिनों तक लगातार आंखों में गंगाजल की 10 से 15 बूंदे डालने की सलाह दी। वैद्य की सलाह का पालन करते हुए दस दिनों तक आंखों में निरंतर गंगाजल भी बूंदे डाली और बीमारी एकदम ठीक हो गई। जिसके बाद उनमें गंगाजल के चमत्कार को जानने की इच्छा प्रबल हुई और गंगा के बारे में जानकारी जुटानी शुरू कर दी।