गंगा रक्षा की खातिर बलिदान दे चुके मातृसदन के युवा संत निगमानंद की मौत का मामला सात साल बाद भी नहीं खुल पाया है।। सीबीआई केस में एक बार क्लोजर रिपोर्ट भी लगा चुकी है। हालांकि कोर्ट के फिर से सीबीआई जांच कराने के आदेश राज्य सरकार को दिए हैं, लेकिन राज्य सरकार इस आदेशों पर कुंडली मारे बैठी है।
वर्ष 2011 में गंगा रक्षा के लिए आंदोलनरत मातृसदन के युवा संत की जौलीग्रांट अस्पताल में मौत हुई थी। संस्था के परमाध्यक्ष शिवानंद सरस्वती ने जिला अस्पताल एवं जौलीग्रांट अस्पताल के चिकित्सकों पर जहर देकर निगमानंद की हत्या कर देने का आरोप जड़ा था। तब मातृसदन के परमाध्यक्ष की तरफ से निगमानंद की हत्या का केस भी दर्ज हुआ था।
सीबीआई भी कई बार जांच के लिए हरिद्वार पहुंची और तथ्य जुटाए। हालांकि माह बाद ही सीबीआई ने संत निगमानंद की मौत के मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। क्लोजर रिपोर्ट के बाद संस्था के परमाध्यक्ष ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तब कोर्ट ने सीबीआई को फिर से निगमानंद के केस की जांच के आदेश दिए थे, लेकिन अब तक भी सीबीआई ने केस को हाथ में नहीं लिया।