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हरिद्वार: कंगना रनौत के बयान पर बाबा रामदेव का पलटवार, बोले- 'मैं ओछे लोगों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता'

Sun, 23 Aug 2026 04:36 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार

सार

Haridwar News: स्वामी रामदेव आज हरिद्वार में संत समागम में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर संवाद कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भाजपा नेता कंगना की ओर से उन पर दिए गए बयानों पर पलटवार किया। इसके साथ ही उन्होंने ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ लागू होने से देश में शिक्षा और विकास के क्षेत्र में बदलाव आने की बात कही।
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बाबा रामदेव और कंगना रानौत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कंगना रनौत और स्वामी रामदेव के बीच चल रही जुबानी जंग पर रामदेव ने फिर पलटवार किया। उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए बिना नाम लिए कहा कि देखो जिन लोगों के बारे में...अभी क्या बोलूं, मैं विवाद को बढ़ावा नहीं देना चाहता। स्वामी रामदेव क्या है, ये देश जानता है। स्वामी रामदेव का योगदान क्या है, ये देश जानता है। इसलिए मैं ओछे लोगों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।

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बता दें कि हाल ही में बाबा रामदेव ने कुछ दिनों पहले सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाया था। इस पर उनकी आंदोलन वाली चेतावनी पर  कंगना ने तंज कसा था। जिसके बाद से ही दोनों के बीच जुबानी जंग चल रही है।

‘वन नेशन वन इलेक्शन’ से  शिक्षा और विकास में होगा बदलाव

योग गुरु स्वामी रामदेव ने वंदे मातरम के अर्थ और महत्व पर एक बयान दिया है, जिसने नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम केवल भारत माता की वंदना है, किसी विशेष देवी-देवता, मंदिर या मठ की पूजा नहीं। रामदेव ने जोर दिया कि भारत माता ही दुर्गा, लक्ष्मी, धर्म, विद्या और सर्वस्व है। उनके अनुसार, वंदे मातरम का सीधा अर्थ मैं भारत माता को नमन करता हूं है।

स्वामी रामदेव ने स्पष्ट किया कि भारत माता को विद्या, धर्म या मंदिर जैसी उपमाओं से विभूषित करना राष्ट्र के प्रति समर्पण है। यह किसी विशिष्ट धार्मिक उपासना का प्रतीक नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत माता ही हमारी वाणी और विद्यादायिनी मां हैं। इस संदर्भ में किसी दुर्गा की उपासना नहीं की जा रही है। रामदेव ने उन लोगों की आलोचना की जो वंदे मातरम को मठ-मंदिरों या देवी-देवताओं से जोड़ते हैं। उन्होंने इसे बौद्धिक दिवालियापन बताया। उनके अनुसार, ऐसे लोग संस्कृत और भारतीय संस्कृति की मूल भावना को नहीं समझते।

स्वामी रामदेव ने सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता पर भी जोर दिया। उन्होंने समाज में फैले भेदभाव और फूट पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि छात्रों, मरीजों, जवानों, किसानों, अनुसूचित जाति-जनजाति या ब्राह्मणों के साथ कोई भी अन्याय संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने ब्राह्मणों के अपमान को भी उतना ही गंभीर बताया। रामदेव ने स्पष्ट किया कि किसी भी वर्ग का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संन्यासियों को गाली देने के बढ़ते चलन पर भी चिंता व्यक्त की।
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