भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ को शारदा पीठ का शंकराचार्य बनाने के प्रस्तावित कार्यक्रम की सूचना पर संत समाज में विवाद खड़ा हो गया है।
शिवरात्रि के दिन शारदा पीठ द्वारिका के जगद्गुरु शंकराचार्य पद पर अच्युतानन्द के पट्टाभिषेक का कार्यक्रम होना है। शारदा पीठ पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद लंबे समय से आसीन हैं। इसकी भनक लगते ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने कार्यक्रम के बहिष्कार की घोषणा कर दी है। साथ ही सन्यासी अखाड़ों की संन्यास परिषद ने भी ऐसे किसी पट्टाभिषेक को अवैध ठहराया है।
गौरतलब है कि द्वारिका की शारदा पीठ पर कई वर्षों से जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती आसीन हैं। भूमा पीठ द्वारा सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी निगमानंद बोध तीर्थ, ब्रह्मानंद सरस्वती, डॉ. प्रेमानंद और राजेंद्र शास्त्री की ओर से जारी निमंत्रण पत्र के अनुसार 24 और 25 फरवरी को हरिपुर के अद्भुत मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में स्वामी अच्युतानंद तीर्थ शारदा पीठ के शंकराचार्य बनेंगे।
उनका पट्टाभिषेक काशी से आए विद्वत परिषद के विद्वान करेंगे। शंकराचार्य बनने के बाद उनका नागरिक अभिनंदन भी किया जाएगा। स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने बताया कि वह इस पीठ पर शिवरात्रि के दिन आसीन हो जाएंगे। इस संबंध में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जिस पीठ पर स्वामी स्वरूपानंद पहले से आसीन हों, उस पर किसी को पीठाधीश्वर नहीं बनाया जा सकता।
इस कार्यक्रम में यदि कोई संत जाता है तो उसे अखाड़ा परिषद से बहिष्कृत माना जाएगा। यदि अच्युतानंद फर्जी रूप से इस पद पर आसीन हुए तो उनका अन्न-जल संत समाज से बंद कर दिया जाएगा। इस आयोजन को निरस्त कर देना चाहिए। अखिल भारतीय संन्यास परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा कि संन्यास परिषद से अनुमति लिए बिना कोई संन्यासी शंकराचार्य पद के लिए अधिकृत नहीं हो सकता।