हाल ही में द्वारिका पीठ पर आसीन हुए स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को कानूनी नोटिस भेजा है। उनका आरोप है कि परिषद ने शंकराचार्य का अपमान किया है। परिषद ने शंकराचार्य को कानूनी जवाब भेज दिया है। अलबत्ता अच्युतानंद सहित अन्य अनेक विवादित विषयों पर अखाड़ा परिषद अब 30 अप्रैल को अहम फैसला करेगी।
अपने अधिवक्ता के माध्यम से भेजे गए नोटिस में स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि उनके शंकराचार्य बनने पर अखाड़ा परिषद द्वारा दिए गए बयानों से उनका अपमान हुआ है। वे विद्वत परिषद द्वारा विधि विधान के अनुसार शंकराचार्य पद पर आसीन किए गए हैं। शारदा पीठ पर उनका अभिषेक पूरी तरह विधान सम्मत है। अखाड़ा परिषद ने उन अन्य संतों का भी अपमान किया है, जो उनके कार्यक्रम में भाग लेने आए थे। यहां तक सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद महाराज के आगमन की भी परवाह नहीं की।
बोले अच्युतानंद तीर्थ, उनके अभिषेक पर बुरा असर
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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष को भेजे गए नोटिस में स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित सभी मान्यताओं का पालन उनके अभिषेक में हुआ है। इसके बावजूद अपमानित करने वाले बयान दिए गए। कथित कार्रवाई का उनके अभिषेक पर बुरा असर पड़ा है। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी ने बताया कि उन्हें कानूनी नोटिस प्राप्त हुआ है और इसका कानूनी जवाब भी साथ-साथ भेज दिया है। अच्युतानंद ने आरोप लगाया है कि उन्हें अपमानित किया गया है, वास्तव में अखाड़ा परिषद ने वही कार्रवाई की है जिसका उसे अधिकार है।
आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चारों पीठों पर पहले से ही चार शंकराचार्य विराजमान हैं। संत जगत के इन सर्वोच्च पदों पर किसी अन्य को कथित रूप से बैठने का कोई अधिकार नहीं है। आदि शंकराचार्य ने जिन दशनाम संन्यासियों का वर्गीकरण किया था, वे सभी अखाड़ा परिषद के अधीन आते हैं। संन्यासियों की परिषद से गिरी, पुरी, भारती, तीर्थ आदि सभी जुड़े हुए हैं। अखाड़ा परिषद के धर्म विरुद्ध हो रही सभी प्रकार की कार्रवाईयों को रोकने या उनके विरुद्ध बयान देने का अधिकार है।
अच्युतानंद के बहिष्कार का निर्णय सभी 13 अखाड़ों ने सर्व सम्मति से लिया था। उन्होंने कहा कि अब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की बैठक आगामी 30 अप्रैल को प्रयाग में हो रही है। इस बैठक में अच्युतानंद सहित उन सभी संतों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी,जिन्होंने धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन किया है।