बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण रुबन कार्यक्रम की स्वजल परियोजना के तहत 2017 -2018 में रानीपोखरी क्षेत्र में करीब 88 प्लांट लगाए गए थे। जबकि, अकेले बडकोट ग्रामसभा में करीब 23 गोबर गैस प्लांट लगाए गए थे। प्रति प्लांट की कीमत 37 हजार रुपये आई थी। लाभार्थी से इसका कोई पैसा नहीं लिया गया। गोबर गैस लगाने की शर्त यह थी कि लाभार्थी के यहां पशुधन होना अनिवार्य है।
हालांकि, प्लांट आवंटन में कुछ केस में इस शर्त का भी उल्लघंन किया गया। बहरहाल गांव में कई घरों में गोबर गैस प्लांट तो लग गए, लेकिन लाभार्थियों का कहना है कि उन्होंने इससे कभी एक कप चाय बनाकर नहीं पी। उन्होंने गोबर गैस प्लांट के बारे में सुना था, ये लगने के बाद कई-कई वर्षों तक चलते हैं, लेकिन यहां पता नहीं कौन सी तकनीक से ये प्लांट लगाए, जो लगने के बाद से ही नहीं चले।
रानीपोखरी कलस्टर में बहुत से घरों में गोबर गैस प्लांट के ठीक से काम न करने की सूचना मिली है। हमने मौके पर टीम भेजकर इस दिखवाया भी है। कुछ घरों में कर्मचारियों को भेजकर इन्हें ठीक कराकर फिर से चालू करवाया है। कई बार जानकारी के आभाव में लाभार्थी गोबर गैस प्लांट का सही तरीके से संचालन नहीं कर पाते हैं, जिसके कारण भी समस्या आती है। अगले कुछ दिनों में सभी प्लांटों को ठीक कराया जाएगा। साथ ही लाभार्थियों को इनके संचालन की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।
- सुशील डोभाल, जिला विकास अधिकारी और जिला परियोजना प्रबंधक, स्वजल
इस विषय में मुझ तक अभी कोई शिकायत नहीं पहुंची है। यदि ऐसा है तो इस मामले की जांच कराई जाएगी। यदि योजना के क्रियान्वयन में कोई हीलाहवाली की गई है तो दोषी पाए जाने वाले कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- उदय राज, अपर सचिव और परियोजना निदेशक, स्वजल