राजधानी में जमीन से सरकारी जमीनों की खरीद फरोख्त में एक और बड़े फर्जीवाड़े की आशंका है। मामला निरंजनपुर क्षेत्र में चाय बागान और जोहड़ आदि की जमीनों की बड़े पैमाने पर खरीद फरोख्त है जिसकी एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में जांच की जा रही है।
जांच समिति के सदस्य पूर्व प्रधान रामसुख ने प्रशासन के सामने नए तथ्यों को रखा है। जांच के लिए 110 संपत्तियों ब्योरा सदस्य पूर्व प्रधान ने बुधवार को प्रशासन को दिया है। इन सब संपत्तियों की खरीद में न सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना हुई बल्कि करोड़ों की स्टांप चोरी का भी आरोप है।
पूर्व प्रधान निरंजपुर व पूर्व पार्षद रामसुख इस मामले को बीते 11 सालों से उठा रहे हैं। उन्होंने पिछले साल नए सिरे से तत्कालीन जिलाधिकारी को इस मामले में शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया था कि राजस्व ग्राम निरंजनपुर के अंतर्गत चाय बागान की सीलिंग की भूमि है। इसे कुछ लोग खुर्द बुर्द कर रहे हैं। जमीनों की कीमत 10 अरब रुपये से भी ज्यादा बताई गई। इस मामले में तत्कालीन एसडीएम सदर ने जांच की और विधिक राय के लिए जिला शासकीय अधिवक्ता को निर्देशित किया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता ने भी अपनी राय में बताया कि इस मामले में जांच कराया जाना आवश्यक है।
ऐसे में जिलाधिकारी के आदेश पर एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया गया जिसमें रामसुख को भी सदस्य बनाया गया। अब रामसुख इस मामले की जांच के दौरान नए तथ्य लेकर आए हैं। उन्होंने 110 संपत्तियों की खरीद फरोख्त की सूची प्रशासन को दी है। यह संपत्तियां एक ऐसे व्यक्ति ने अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों को बेची हैं जो इस वक्त विदेश में रह रहा है। इसके अलावा 90 बीघा जोहड़ व अन्य सरकारी जमीनों को बेचने के तथ्य भी जांच समिति को उपलब्ध कराए गए हैं। अब यह फर्जीवाड़ा खुलता है या फिर जांच यूं ही चलती रहेगी यह आने वाला वक्त बताएगा। हालांकि, इन तथ्यों से एक बड़े फर्जीवाड़े की आशंका जरूर जताई जा रही है।
रामसुख जता चुके हैं जान माल का खतरा
रामसुख जांच समिति के साथ मिलकर इस मामले की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने गत दिनों अपनी जान माल का खतरा भी बताया था। उन्होंने 16 जून को जिलाधिकारी को पत्र लिखा था कि इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले शहर के अमीर घरानों के लोग हैं। ऐसे में वह उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में जिला प्रशासन ने हर पहलु को ध्यान में रखकर जांच कराने के निर्देश दिए हैं।