करोड़ों रुपये में होना था सौदा
उसने पुलिस को बताया कि यह उपकरण नकली है और उसने कभी नहीं बेचा। यह उपकरण तबरेज और उसके एक साथी ने अपने घर पर बनाया था। इससे एक बात तो साफ हो गई कि यह उपकरण नकली है। लेकिन, किसने और कब इसे बनाया इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। सूत्रों के मुताबिक इतना भी साफ हो गया है कि इसका सौदा करोड़ों रुपये में होना था। इस पूछताछ में एक नाम लव मल्होत्रा का भी सामने आया था। लव को ही इस उपकरण को खरीदना था। बताया गया था कि लव के पास इस तरह के उपकरणों को बेचने और खरीदने का लाइसेंस है। लेकिन, पुलिस के सामने पहुंचा लव अपने साथ कोई दस्तावेज लेकर नहीं आया है। देर रात तक पुलिस उससे पूछताछ कर रही थी।
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तो राजस्थान की घटना से प्रेरित हो सुमित ने बनाया उपकरण
बताया जा रहा है कि इस पूरी कहानी के पीछे सुमित पाठक नाम के आरोपी का दिमाग है। सुमित पाठक दिल्ली में पुराने सामान खरीदने-बेचने का काम करता है। वह बहुत सी पुरानी चीजों को नकली बनाकर महंगे दामों पर बेचता है। बताया जा रहा है कि सुमित पाठक ने राजस्थान में हुई 14 करोड़ रुपये की ठगी से प्रेरित होकर इस तरह का षडयंत्र रचा था। इसी तरह के उपकरण को बेचने का राजस्थान में ठगों ने जाल बुना था।
राजस्थान पुलिस ने उस वक्त 18 लोगों को गिरफ्तार किया था। इन आरोपियों ने सात लोगों से 14 करोड़ रुपये की ठगी इस तरह के एक नकली उपकरण को बेचकर की थी। पुलिस के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार सुमित पाठक ने ही अपनी दुकान व कार्यशाला पर इस उपकरण को बनाया था। ताकि, वह इसे इसी तरह बेचकर करोड़ों रुपये की ठगी कर सके। हालांकि, अभी सुमित से भी पुलिस कस्टडी रिमांड में लेकर पूछताछ की जानी बाकी है। जल्द ही पुलिस उसकी पीसीआर मांग सकती है।