सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने याची के अधिवक्ता से यह भी कहा था कि आप चाहें तो फिल्म को न देखें। खंडपीठ ने कहा था कि आप लोगों ने पहले भी पद्मावत फिल्म पर विवाद छेड़कर उसे सुपर हिट बना दिया था।
खंडपीठ ने यह भी कहा था कि रुद्रप्रयाग के डीएम अपने विवेक का इस्तेमाल कर अपने निहित अधिकारों में कानून व्यवस्था के बिगड़ने की स्थिति में इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा सकते हैं।
इस मामले में याची स्वामी दर्शन भारती का कहना था कि केदारनाथ वासियों के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी ईष्ट हैं। फिल्म से केदारनाथ का अपमान हो रहा है, इसलिए फिल्म पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।
तन मन के साथ फिल्म को रिलीज होने से रोकने के लिए शरीर भी देना पड़े तो वह तैयार है। फिल्म का टीजर रिलीज होते ही केदारनाथ आपदा की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म पर लव जिहाद को बढ़ावा देने, सुशांत सिंह और सारा अली खान के बीच आपत्तिजनक अंतरंग दृश्य दर्शाने के आरोप लगने लगे थे।
केदारनाथ के पुजारियों सहित आम लोगों ने भी इसके प्रदर्शन पर रोक की मांग की थी। इनकी समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी।
समिति में डीजीपी अनिल रतूड़ी, सचिव गृह नितेश झा और सचिव सूचना दिलीप जावलकर शामिल थे। यद्यपि सरकार ने फिल्म पर प्रतिबंध नहीं लगाया, लेकिन जिलाधिकारियों को अपने जिलों में स्वयं निर्णय लेने को कहा था। नैनीताल सहित प्रदेश के सात जिलों देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, पौड़ी, टिहरी और अल्मोड़ा में फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई थी।