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Dehradun News: हनोल में उमड़ा आस्था का सैलाब, 120 करोड़ के मास्टर प्लान से संवरेगा सिद्धपीठ

Mon, 14 Sep 2026 02:30 AM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
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जौनसार-बावर के आराध्य महासू देवता के सिद्धपीठ हनोल में रविवार को पारंपरिक जागड़ा पर्व के अवसर पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने देवता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस मौके पर प्रदेश के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने ऐलान किया कि 120 करोड़ रुपये की लागत वाले मास्टर प्लान से हनोल धाम का भव्य विकास किया जाएगा।
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पर्व की शुरुआत रविवार ब्रह्म मुहूर्त में पुजारियों की ओर से मंदिर के कपाट खोलकर महासू देवता को लूंग (हरियाली) अर्पित करने के साथ हुई। इसके पश्चात देवता के वजीर व स्याणाओं को लूंग भेंट की गई। सुबह से ही दर्शनों के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। प्रदेश के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने भी सपरिवार धाम पहुंचकर देवता का आशीर्वाद लिया और भंडारे में श्रद्धालुओं को अपने हाथों से प्रसाद वितरित किया। एसडीएम प्रेमलाल ने बताया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए चप्पे-चप्पे पर पुलिस और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है। व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में नायब तहसीलदार सरदार सिंह, मंदिर समिति के सचिव मोहन लाल, राजाराम, राजेंद्र चौहान, प्रहलाद जोशी, प्रभाकर जोशी सहित अन्य पदाधिकारी मुस्तैद रहे।

धार्मिक पर्यटन से मिलेगी नई पहचान
पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज नंगे पैर मंदिर पहुंचे और पर्व का विधिवत शुभारंभ किया। श्रद्धालुओं को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान के तहत होने वाले विकास कार्यों के पूरा होने पर हनोल क्षेत्र को एक नई पहचान मिलेगी। सरकार के इस प्रयास से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। जागड़े के पहले दिन चकराता विधायक प्रीतम सिंह, पुरोला विधायक दुर्गेश लाल, पूर्व बागवानी बोर्ड अध्यक्ष प्रताप रावत और पूर्व राज्यमंत्री मूरत राम शर्मा सहित कई गणमान्य लोगों ने भी महासू देवता के दर्शन किए।
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रातभर गूंजे देवगीत, वाद्य यंत्रों की थाप पर हुआ पारंपरिक नृत्य
शनिवार रात से ही मंदिर परिसर में देव स्तुति और भजनों का दौर शुरू हो गया था। गीत-गायन और पारंपरिक हारुल-तांदी नृत्य से हनोल का पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। हनोल के अलावा बासिक महाराज, पवासी महाराज और हिमाचल प्रदेश के पश्मी में प्रवास कर रहे चालदा महासू देवता के मंदिर में भी जागड़ा पर्व की विशेष धूम रही।
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