यह निर्देश भी दिए
- पीएम राहत योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए, क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से किया जाए।
- लावारिस पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम को नीति बनाए
- वर्तमान में स्थापित एनएनपीआर कैमरों में चिह्नित ट्रैफिक वॉयलेशन में अन्य अभियोगों को भी सम्मिलित किया जाए।
- चालक लाइसेंस जारी करने से पहले चालकों की परीक्षा कंप्यूटराइज्ड आधार पर लेने के लिए ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक की स्थापना करें।
- उच्चतम न्यायालय ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा के निर्देश दिए हैं, उक्त निर्देशों के अनुपालन में नियमावली और एसओपी तैयार करे
15 हजार किमी सड़क नेटवर्क 5714 किमी पर ही क्रैश बैरियर
राज्य में करीब 15 हजार किमी सड़क नेटवर्क के बावजूद हजारों किमी मार्ग पर क्रैश बैरियर नहीं लगे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्घटना की स्थिति में वाहनों को गहरी खाई में गिरने से बचाने के लिए क्रैश बैरियर जरूरी हैं।
राज्य में कुल 15,122.85 किमी सड़क नेटवर्क है। इसमें 8422.78 किमी मार्ग क्रैश बैरियर के लिए चिह्नित है, लेकिन अब तक 5714.96 किमी पर ही बैरियर लगाए जा सके हैं। 2702.82 किमी मार्ग पर अभी काम बाकी है। वहीं, 6700 किमी सड़क को क्रैश बैरियर के लिए चिह्नित ही नहीं किया गया है।
सड़क सुरक्षा को लेकर हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष अभय मनोहर सप्रे ने शेष मार्गों पर क्रैश बैरियर लगाने के लिए समय-सीमा तय कर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि क्रैश बैरियर आईआरसी मानकों के अनुरूप हों।
राज्य के 2559 स्थान सड़क हादसों के लिहाज से संवेदनशील चिह्नित किए गए थे। इनमें 2140 स्थानों पर सुधारात्मक कार्य हो चुका है, जबकि 419 पर काम बाकी है। इसके अलावा 179 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे, जिनमें 169 पर सुधारात्मक कार्य पूरा किया जा चुका है।