हाईकोर्ट को बताया गया था कि पिछले नौ में से केवल छह बाघों की मौत प्राकृतिक तरीके से हुई जिसके बाद हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया। वहीं पिछले ढाई सालों में राज्य में 40 बाघों और 272 तेंदुओं की मौत हो चुकी है।
हाईकोर्ट के संज्ञान में यह भी लाया गया था कि धुलवा और धुमान्दा में पड़ने वाला 318.80 हेक्टेयर का क्षेत्र औपचारिक तौर पर कार्बेट टाइगर रिजर्व के तहत नहीं आता है। इसके बाद हाईकोर्ट ने इन इलाकों को एक महीने में कार्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शामिल करने के लिए सभी प्रभावी कदम उठाने का आदेश दिया था।