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सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देहरादून के बिल्डरों में हड़कंप, बिल्डरों की मनमानी रोकेगा रेरा

Wed, 24 Jul 2019 10:07 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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सुप्रीम कोर्ट
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राजधानी में बिल्डरों की मनमानी चरम पर है। अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया तो बिल्डरों में भी हड़कंप मच गया है। रेरा की ओर से बिल्डरों की मनमानी की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी जाएगी। रेरा में दून के बिल्डरों के खिलाफ 90 से ज्यादा शिकायतें हैं, जिनमें से अधिकतर बिल्डर द्वारा रकम लेने के बाद भी कब्जा नहीं देने की हैं।

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बिल्डरों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन पर रेरा के आदेशों का भी कोई असर नहीं हो रहा है। इसी बीच मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगने और आम आदमी को राहत मिलने की आस जगी है। वहीं, दूसरी ओर इस आदेश से बिल्डरों में हड़कंप मच गया है। 

केस 1 : राजधानी में एमएनटी बिल्डकॉन की व्यवसायिक परियोजना के तहत लोगों को वर्ष 2015 में कब्जा देने का वादा किया था, लेकिन जनवरी तक उन्हें कब्जा नहीं दिया गया। जिसके बाद निवेशकों ने इसकी शिकायत रेरा में दर्ज कराई। रेरा ने एमएनटी बिल्डकॉन पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। 
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केस 2 : ईसी रोड निवासी समीर मिश्रा ने वर्ष 2006 में जीटीमए बिल्डर हरिद्वार रोड स्थित जीटीएम फॉरेस्ट हिल्स प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया था। फ्लैट के लिए तय रकम से ज्यादा का भुगतान करने के बाद भी ग्राहक को फ्लैट नहीं दिया, जिस पर जनवरी में रेरा ने बिल्डर को पूरी रकम ब्याज के साथ वापस करने के आदेश दिए थे। 

बता दें कि आम्रपाली समूह के मामले सहित अन्य राज्यों में पैसा लेने के बाद भी फ्लैट न देने वाले बिल्डरों पर सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने छह महीने में कार्रवाई की रिपोर्ट भी तलब की है। आदेश के अनुसार रेरा ऐसे मामलों की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध कराएगा।  

प्रदेश में 2017 में बने रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) में अब तक 405 शिकायतें पहुंची हैं। जिनमें से अभी तक केवल 273 मामलों का ही निस्तारण हुआ है। जबकि 132 शिकायतें अब भी लंबित हैं। प्रदेश में करीब 250 परियोजनाएं रेरा में पंजीकृत हैं। इनमें से करीब 80 परियोजनाएं दून जिले में चल रही हैं। यहां बिल्डरों में रेरा का कोई खौफ नहीं है। वह खरीदार से फ्लैट का पैसा तो ले लेते हैं, लेकिन कब्जा नहीं देते हैं। रेरा में 200 से अधिक शिकायतें रिफंड को लेकर आ चुकी हैं।  

रेरा में अब तक आईं शिकायतें 
शिकायत     - 405 
निस्तारण - 273 
क्रेता को रुपये लौटाने - 154
क्रेता को कब्जा देने - 63
शिकायतें निरस्त - 24
आपसी समझौता - 32

300 को नोटिस, 65 ने दिया जवाब  
बिल्डरों में रेरा का भय नहीं है। रेरा ने 2017 से अब तक 300 से अधिक बिल्डरों को नोटिस भेजे हैं, जिनमें से अब तक केवल 65 बिल्डरों ने ही जवाब दिया है। जिन बिल्डरों ने जवाब नहीं दिया, अब उन्हें अंतिम नोटिस भेजने की तैयारी हो रही है। रेरा अध्यक्ष के विष्णु कुमार के मुताबिक 300 से बिल्डरों को रेरा के तहत पंजीकरण कराना था, लेकिन अभी तक करीब 100 बिल्डरों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। अब रेरा इनके खिलाफ विधिक कार्रवाई भी करने की तैयारी कर रहा है। 

सबसे अधिक शिकायतें निशु कंस्ट्रक्शन की 
रेरा के पास सबसे अधिक शिकायतें रुड़की के निशु कंस्ट्रक्शन की हैं। उसके खिलाफ करीब 80 शिकायतें रेरा में दर्ज हैं। इसके बाद ऊधमसिंह नगर के सामिया बिल्डर के खिलाफ 25 शिकायते हैं। वहीं, रेसिजोन, एलायंस कंस्ट्रक्शन, जीटीएम और एमएनटी बिल्डकॉन, पनाश हाईट्स, एबीएल प्रोजेक्टस आदि के खिलाफ भी काफी शिकायतें हैं। 

स्टाफ बढ़े तो आएगी और तेजी 
रेरा में स्टाफ की कमी है, यही वजह है कि जिस गति से काम होना चाहिए, नहीं हो रहा है। रेरा अध्यक्ष ने 10 कार्मिकों के रिक्त पदों को भरने के लिए शासन को बीते महीने पत्र भेजा था। जिसमें मुख्य अभियंता व अवर अभियंता की एक-एक, पांच कंप्यूटर ऑपरेटर तथा तीन चपरासी के पद भरने की सिफारिश की गई थी। मौजूदा समय में रेरा के तीन अधिकारियों के अलावा एक कंप्यूटर ऑपरेटर, तीन क्लर्क और दो चपरासी ही कार्यरत हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली समूह मामले में अच्छा निर्णय दिया है। इससे खरीदारों का फ्लैट अटकाने वाले बिल्डरों पर शिकंजा कसेगा। प्रदेश के मामलों की जानकारी दी गई समयसीमा पर सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध कराई जाएगी। 
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- विष्णु कुमार, अध्यक्ष रेरा

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