पति से तलाक का दंश झेल रही शायरा बानो सवा दो साल से अपने कलेजे के टुकड़ों से मिलने को आज भी तरस रही है। जैसे ही कोर्ट का फेसला आया शायरा बानो की आंखों से अपने बच्चों को याद कर आसू छलक पड़े।
उसने बच्चों की सुपुर्दगी के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय अदालत में याचिका दायर करने का निर्देश दिया। काशीपुर फैमिली कोर्ट से विपक्षी को कई बार नोटिस जा चुके हैं, लेकिन वो आज तक हाजिर नही हुआ। मामले की अगली सुनवाई 10 अक्तूबर को होगी।
शायरा के रिजवान से दो बच्चे हुए। बेटा इरफान 13 साल का है और बेटी मुस्कान 11 साल की है। पति ने कागज के टुकड़े पर तलाक के तीन बोल लिखकर शायरा को अपनी जिंदगी से अलग कर दिया।
पति से अलगाव तो शायरा पर भारी पड़ा ही, लेकिन बच्चों की ममता उसे ज्यादा सताने लगी। बच्चों को लेकर उसने कई बार रिजवान और उसके परिजनों से फोन पर बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हर बार फोन काट दिया। हारकर उसे कोर्ट की ओर रुख करना पड़ा
शायरा बानों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हूं और इस फैसले का समर्थन करती हूं। इस फैसले से देश की उन मुस्लिम महिलाओं में अपने अधिकार को लेकर आशा की किरन चमकी है, जिन्हें सामाजिक रूढ़िवादिता के चलते धार्मिक आडंबर के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने का अवसर नही मिल पाता था। मैं इस फैसले से उत्साहित हूं। आगे भी महिलाओं के हक में लड़ाई जारी रखूंगी।