गैरसैंण विधानसभा सत्र में रखे जाने वाला प्रथम अनुपूरक बजट सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अधिभार से दब गया है।
राज्य सरकार बहुत अधिक हाथ दबाकर विभागों को पैसा देगी। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से सरकार पर सालाना करीब एक हजार करोड़ से अधिक का अधिभार पड़ने वाला है। इससे नाममात्र का अनुपूरक बजट ही विधानसभा सत्र में रखा जाएगा।
राज्य बनने के बाद शायद पहली बार ऐसा हो रहा है कि विभागों को अनुपूरक बजट तैयार करने के लिए वित्त विभाग ने पहले से पत्र नहीं भेजा। कई विभागों में दो-तीन दिन पहले तक वित्त विभाग से पत्र का इंतजार होता रहा है। शुक्रवार को ऐन वक्त पर अनुभागों से जल्दी से अपनी मांग प्रस्तुत करने के लिए कहा गया।
विकास कार्यों से जुड़े विभागों को अनुपूरक बजट का इंतजार इस बार पहले से अधिक है। मुख्यमंत्री घोषणाओं से संबंधित योजनाओं के शासनादेश जारी हो चुके हैं। इस संबंध में कुछ योजनाओं के लिए बजट भी आवंटित कर दिया गया है, लेकिन विभाग को पैसा अभी नहीं पहुंच पाया है।
विभागों को पैसे की जरूरत है। कई विभागों ने योजनाओं को पूरा करने के लिए अनुपूरक बजट से उम्मीद लगा रखी है। लेकिन, शासन के सामने अब सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करना पहली प्राथमिकता हो गया है।
उत्तराखंड वेतन समिति ने सॉफ्टवेयर तैयार कर लिया है। विभागीय सूत्रों ने बताया कि पैसे की कमी की वजह से कई योजनाओं के चेक जारी तो हो गए हैं, लेकिन उन्हें अभी ट्रेजरी में रोक रखा है।
विधानसभा सत्र के लिए विभागों से अनुपूरक बजट डिमांड ली गई है। इसमें बहुत थोड़ा सा बजट रखा जाता है। थोड़े-बहुत पैसे से कोई योजना अटकी होती है तो उसमें व्यवस्था कर दी जाती है।
- अमित नेगी, सचिव वित्त